
श्री सूर्य चालीसा
श्री सूर्य चालीसा भगवान सूर्य नारायण को समर्पित एक अत्यंत पवित्र और दिव्य स्तुति है। भगवान सूर्य को प्रत्यक्ष देवता माना जाता है क्योंकि वे प्रतिदिन सम्पूर्ण संसार को प्रकाश, ऊर्जा और जीवन प्रदान करते हैं। वैदिक परंपरा में सूर्य देव को स्वास्थ्य, तेज, ज्ञान, आत्मबल, सफलता और सकारात्मक ऊर्जा का स्रोत माना गया है। श्रद्धा और विश्वास के साथ श्री सूर्य चालीसा का नियमित पाठ करने से मन में आत्मविश्वास बढ़ता है, जीवन में नई ऊर्जा का संचार होता है और ईश्वर के प्रति आस्था मजबूत होती है।
भगवान सूर्य नवग्रहों के राजा माने जाते हैं और वे सात घोड़ों वाले दिव्य रथ पर विराजमान रहते हैं। उनका तेज समस्त संसार के अंधकार को दूर करता है तथा जीवन में प्रकाश, ज्ञान और सकारात्मकता का संदेश देता है। धार्मिक ग्रंथों में भगवान सूर्य को समस्त देवताओं के नेत्र तथा सम्पूर्ण सृष्टि के पालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला देव बताया गया है।
श्री सूर्य चालीसा क्या है?
श्री सूर्य चालीसा चालीस चौपाइयों और दोहों से युक्त एक पवित्र स्तोत्र है, जिसमें भगवान सूर्य के दिव्य स्वरूप, उनकी महिमा, कृपा और भक्तों के जीवन में उनके महत्व का सुंदर वर्णन किया गया है। इस चालीसा का नियमित पाठ व्यक्ति को अनुशासित जीवन, सकारात्मक सोच, परिश्रम और आत्मबल का महत्व समझाता है।
यह चालीसा केवल भगवान सूर्य की स्तुति नहीं है, बल्कि जीवन में समय का सम्मान, निरंतर कर्म, आत्मविश्वास और अनुशासन अपनाने की प्रेरणा भी देती है। भगवान सूर्य का उदय प्रतिदिन यह संदेश देता है कि प्रत्येक नया दिन नई शुरुआत और नए अवसर लेकर आता है।
श्री सूर्य चालीसा का महत्व
हिंदू धर्म में भगवान सूर्य को जीवनदाता, स्वास्थ्यदाता और ऊर्जा के देवता माना जाता है। प्राचीन काल से ही ऋषि-मुनि सूर्य उपासना को शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक विकास का महत्वपूर्ण माध्यम मानते आए हैं। प्रतिदिन भगवान सूर्य को अर्घ्य देना और उनका स्मरण करना शुभ माना जाता है।
रविवार, मकर संक्रांति, रथ सप्तमी, छठ पूजा तथा सूर्य ग्रहण के पश्चात स्नान और पूजा जैसे अवसरों पर श्री सूर्य चालीसा का पाठ विशेष रूप से शुभ माना जाता है। अनेक श्रद्धालु प्रतिदिन प्रातःकाल सूर्य उदय के समय भगवान सूर्य का ध्यान करते हुए इस चालीसा का पाठ करते हैं।
यह चालीसा हमें यह प्रेरणा देती है कि जीवन में आलस्य छोड़कर नियमित परिश्रम, अनुशासन और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ना चाहिए।
श्री सूर्य चालीसा के लाभ
- भगवान सूर्य के प्रति श्रद्धा और भक्ति मजबूत होती है।
- मन में आत्मविश्वास, उत्साह और सकारात्मक ऊर्जा का विकास होता है।
- नियमित और अनुशासित जीवन जीने की प्रेरणा मिलती है।
- आध्यात्मिक साधना और ईश्वर के प्रति विश्वास बढ़ता है।
- मानसिक शांति और सकारात्मक सोच विकसित होती है।
- धैर्य, परिश्रम और आत्मबल में वृद्धि होती है।
- समय का सम्मान करने और कर्मठ बनने की प्रेरणा मिलती है।
- परिवार में सुख, शांति और सकारात्मक वातावरण बना रहता है।
- जीवन में नई ऊर्जा और उत्साह का अनुभव होता है।
- भगवान सूर्य की कृपा से धर्म और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा प्राप्त होती है।
श्री सूर्य चालीसा कब पढ़नी चाहिए?
श्री सूर्य चालीसा का पाठ प्रतिदिन प्रातःकाल सूर्य उदय के समय करना अत्यंत शुभ माना जाता है। स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूर्व दिशा की ओर मुख करके भगवान सूर्य को जल अर्पित करने के बाद श्रद्धापूर्वक चालीसा का पाठ करें।
रविवार, रथ सप्तमी, मकर संक्रांति, छठ पूजा और अन्य सूर्य उपासना के अवसरों पर इसका विशेष महत्व माना जाता है। नियमित रूप से प्रातःकाल किया गया पाठ आध्यात्मिक अनुशासन विकसित करने में सहायक माना जाता है।
श्री सूर्य चालीसा पढ़ने की विधि
- प्रातः ब्रह्ममुहूर्त या सूर्योदय से पहले उठें और स्नान करें।
- स्वच्छ वस्त्र धारण करके पूर्व दिशा की ओर मुख करें।
- तांबे के पात्र में जल लेकर भगवान सूर्य को अर्घ्य अर्पित करें।
- लाल पुष्प, लाल चंदन और अक्षत अर्पित करें।
- कुछ समय तक भगवान सूर्य नारायण का ध्यान करें।
- पूर्ण श्रद्धा और एकाग्रता के साथ श्री सूर्य चालीसा का पाठ करें।
- अपने परिवार, समाज और समस्त संसार के कल्याण की प्रार्थना करें।
- पाठ के अंत में सूर्य देव को प्रणाम करें और दिनभर अच्छे कर्म करने का संकल्प लें।
श्री सूर्य चालीसा का पाठ करने से पहले ध्यान रखने योग्य बातें
- प्रातःकाल स्वच्छता और पवित्रता का विशेष ध्यान रखें।
- जहाँ तक संभव हो सूर्य उदय के समय ही पाठ करें।
- भगवान सूर्य को तांबे के पात्र से जल अर्पित करना शुभ माना जाता है।
- पाठ करते समय मन को शांत और एकाग्र रखें।
- जीवन में अनुशासन, समय की पाबंदी और परिश्रम को अपनाने का संकल्प लें।
- किसी के प्रति द्वेष या नकारात्मक भावना लेकर पूजा न करें।
- श्रद्धा, विश्वास और नियमितता के साथ श्री सूर्य चालीसा का पाठ करें।
अब आइए, श्रद्धा, सकारात्मक ऊर्जा और पूर्ण समर्पण के साथ सम्पूर्ण श्री सूर्य चालीसा का पाठ करें तथा भगवान सूर्य नारायण की दिव्य कृपा, तेज और आशीर्वाद प्राप्त करें।
सम्पूर्ण श्री सूर्य चालीसा
अब श्रद्धा, विश्वास और पूर्ण समर्पण के साथ भगवान सूर्य नारायण का ध्यान करें तथा श्री सूर्य चालीसा का पाठ करें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान सूर्य सम्पूर्ण सृष्टि को प्रकाश, ऊर्जा और जीवन प्रदान करते हैं। उनके प्रति श्रद्धापूर्वक किया गया यह पाठ आत्मबल, सकारात्मक सोच और आध्यात्मिक जागरूकता विकसित करने की प्रेरणा देता है।
॥ दोहा ॥
जय आदित्य भगवान, जग जीवन आधार।
करहु कृपा भक्तन पर, हरहु सकल संताप॥
सप्त अश्व रथ पर विराज, तेज पुंज अपार।
सूर्य नारायण देव प्रभु, राखो हमारी लाज॥
॥ चौपाई ॥
जय जय रवि भगवान दयाला।
जगत प्रकाशित करने वाला॥
सप्त अश्व रथ अति सुखकारी।
अरुण सारथि सेवा धारी॥
काश्यप नंदन तेज अपारा।
जगत प्रकाशित किया तुम्हारा॥
अंधकार सब दूर भगावो।
जीवन में उजियारा लावो॥
ज्ञान प्रकाश हृदय में भर दो।
सद्बुद्धि का वरदान कर दो॥
रोग शोक सब दूर करावो।
तन मन में उत्साह जगावो॥
भक्त पुकार सुनो भगवान।
पूरण कर दो सब अरमान॥
धैर्य शक्ति मन में भर दीजै।
सत्कर्मों की राह बताइए॥
समय सदा सम्मान सिखावो।
जीवन को सफल बनावो॥
परिश्रम का महत्व बतावो।
आलस सब मन से हटावो॥
सत्य धर्म का मार्ग दिखावो।
सदाचार हमें अपनावो॥
दीन दुखी पर दया दिखावो।
सबका जीवन सुखमय बनावो॥
रवि किरण सुख शांति दिलावे।
भक्त हृदय आनंद बढ़ावे॥
जो जन नित गुणगान करावे।
मनवांछित फल सहजहि पावे॥
रविवार व्रत जो अपनावे।
सूर्य कृपा जीवन में पावे॥
अर्घ्य जल जो नित चढ़ावै।
भक्ति भाव मन में बढ़ावै॥
करुणा सागर दीन दयाला।
भक्त जनों के तुम रखवाला॥
भवसागर से पार लगावो।
अपने चरणन में बसावो॥
जय जय सूर्य नारायण स्वामी।
सबके अंतर्यामी॥
कृपा दृष्टि हम पर बरसाओ।
जीवन में मंगल फल पाओ॥
॥ समापन दोहा ॥
जो यह सूर्य चालीसा, श्रद्धा सहित पढ़ाय।
सूर्य कृपा से भक्त जन, सुख समृद्धि सब पाय॥
जय सूर्य नारायण देव।
जय आदित्य भगवान॥
श्री सूर्य चालीसा का नियमित पाठ क्यों करें?
श्री सूर्य चालीसा का नियमित पाठ भगवान सूर्य के तेज, अनुशासन, परिश्रम और सकारात्मक ऊर्जा का स्मरण कराता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्रद्धा और विश्वास के साथ किया गया यह पाठ व्यक्ति को आत्मबल, आत्मविश्वास, समय का महत्व और निरंतर कर्म करने की प्रेरणा देता है। भगवान सूर्य का तेज हमें यह सिखाता है कि प्रत्येक दिन एक नई शुरुआत है और जीवन में निरंतर आगे बढ़ते रहना ही सफलता का मार्ग है।
अब जब आपने श्रद्धापूर्वक सम्पूर्ण श्री सूर्य चालीसा का पाठ कर लिया है, आइए अगले भाग में इसकी प्रत्येक चौपाई का सरल भावार्थ और आध्यात्मिक महत्व विस्तार से समझते हैं।
श्री सूर्य चालीसा का भावार्थ
श्री सूर्य चालीसा भगवान सूर्य नारायण की दिव्य महिमा, तेज, ऊर्जा और जीवनदायी स्वरूप का वर्णन करने वाला एक पवित्र स्तोत्र है। इसकी प्रत्येक चौपाई हमें यह संदेश देती है कि जीवन में अनुशासन, परिश्रम, आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच का विशेष महत्व है। भगवान सूर्य प्रत्यक्ष देवता माने जाते हैं क्योंकि वे प्रतिदिन सम्पूर्ण संसार को प्रकाश, ऊर्जा और जीवन प्रदान करते हैं। श्रद्धा और विश्वास के साथ श्री सूर्य चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति के भीतर आत्मबल, उत्साह और आध्यात्मिक जागरूकता का विकास होता है।
यह चालीसा केवल भगवान सूर्य की स्तुति नहीं है, बल्कि उनके जीवनदायी संदेश को अपने दैनिक जीवन में अपनाने का भी माध्यम है। जैसे सूर्य बिना किसी भेदभाव के सम्पूर्ण संसार को प्रकाश देते हैं, वैसे ही मनुष्य को भी अपने कर्मों द्वारा समाज में सकारात्मकता फैलानी चाहिए।
भगवान सूर्य का दिव्य स्वरूप
भगवान सूर्य को नवग्रहों का राजा तथा सम्पूर्ण ब्रह्मांड के प्रकाश का स्रोत माना गया है। वे सात घोड़ों वाले दिव्य रथ पर विराजमान रहते हैं और उनके सारथी अरुण हैं। सात घोड़े सात रंगों, सात दिनों, सात छंदों और जीवन की निरंतर गति का प्रतीक माने जाते हैं।
भगवान सूर्य का तेज ज्ञान, सत्य, आत्मबल और जागरूकता का प्रतीक है। उनका दिव्य स्वरूप यह सिखाता है कि जीवन में अज्ञान का अंधकार केवल ज्ञान, परिश्रम और ईश्वर के प्रति श्रद्धा से ही दूर किया जा सकता है।
प्रकाश और ऊर्जा का संदेश
सूर्य प्रतिदिन बिना रुके अपने कर्तव्य का पालन करते हैं। वे कभी आलस्य नहीं करते और न ही किसी प्रकार का भेदभाव करते हैं। श्री सूर्य चालीसा हमें यही प्रेरणा देती है कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने कर्तव्यों का पालन पूरी निष्ठा, ईमानदारी और नियमितता के साथ करना चाहिए।
भगवान सूर्य का प्रकाश केवल बाहरी अंधकार को ही नहीं, बल्कि मन के अज्ञान, निराशा और नकारात्मक विचारों को भी दूर करने का प्रतीक माना जाता है।
श्री सूर्य चालीसा का आध्यात्मिक संदेश
श्री सूर्य चालीसा का मुख्य संदेश यह है कि जीवन में अनुशासन, समय की पाबंदी और निरंतर परिश्रम ही सफलता की वास्तविक कुंजी हैं। भगवान सूर्य हमें सिखाते हैं कि प्रत्येक नया दिन एक नया अवसर लेकर आता है और हमें हर दिन अपने जीवन को बेहतर बनाने का प्रयास करना चाहिए।
यह चालीसा हमें सकारात्मक सोच, आत्मविश्वास और अच्छे कर्मों के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है। भगवान सूर्य का स्मरण व्यक्ति के भीतर नई ऊर्जा और उत्साह का संचार करता है।
स्वास्थ्य और आत्मबल का महत्व
वैदिक परंपरा में भगवान सूर्य को स्वास्थ्य और जीवन शक्ति का देवता माना गया है। प्रातःकाल सूर्य को अर्घ्य देना, सूर्य नमस्कार करना और श्रद्धापूर्वक सूर्य उपासना करना शरीर तथा मन दोनों के लिए लाभकारी माना जाता है।
श्री सूर्य चालीसा हमें यह भी सिखाती है कि स्वस्थ शरीर, सकारात्मक मन और अनुशासित जीवन ही आध्यात्मिक उन्नति का आधार हैं।
अनुशासन और समय का महत्व
भगवान सूर्य कभी अपने समय से विलंब नहीं करते। उनका नियमित उदय और अस्त हमें समय का सम्मान करना सिखाता है। श्री सूर्य चालीसा का पाठ हमें समय का सदुपयोग करने, आलस्य छोड़ने और प्रत्येक कार्य को समय पर पूरा करने की प्रेरणा देता है।
जो व्यक्ति अनुशासित जीवन अपनाता है, वह अपने लक्ष्य की ओर निरंतर आगे बढ़ता है और जीवन में अधिक संतुलन तथा सफलता प्राप्त करता है।
नियमित पाठ का महत्व
प्रतिदिन प्रातःकाल अथवा विशेष रूप से रविवार, रथ सप्तमी, मकर संक्रांति और छठ पूजा के अवसर पर श्री सूर्य चालीसा का पाठ करना शुभ माना जाता है। नियमित पाठ से मन में सकारात्मक ऊर्जा का विकास होता है और व्यक्ति अपने दैनिक जीवन में अधिक अनुशासित बनने का प्रयास करता है।
श्रद्धा और विश्वास के साथ किया गया यह पाठ आत्मबल, मानसिक शांति और आध्यात्मिक जागरूकता को मजबूत करने में सहायक माना जाता है।
भगवान सूर्य की कृपा प्राप्त करने के सरल उपाय
- प्रतिदिन सूर्योदय के समय भगवान सूर्य को जल अर्पित करें।
- श्री सूर्य चालीसा का नियमित श्रद्धापूर्वक पाठ करें।
- सूर्य नमस्कार और प्रातःकालीन ध्यान को अपनी दिनचर्या का भाग बनाएँ।
- समय का सम्मान करें और अनुशासित जीवन अपनाएँ।
- सत्य, ईमानदारी और परिश्रम को अपने जीवन का आधार बनाएँ।
- जरूरतमंद लोगों की सहायता करें और सेवा का भाव रखें।
- प्रतिदिन सकारात्मक सोच और अच्छे कर्मों के साथ अपने दिन की शुरुआत करें।
श्री सूर्य चालीसा से मिलने वाली प्रेरणा
श्री सूर्य चालीसा हमें यह सिखाती है कि जीवन में सफलता का आधार परिश्रम, अनुशासन, आत्मविश्वास और निरंतर कर्म है। भगवान सूर्य का तेज हमें प्रेरणा देता है कि परिस्थितियाँ चाहे जैसी भी हों, हमें अपने कर्तव्यों का पालन निरंतर करते रहना चाहिए।
जो भक्त श्रद्धा और विश्वास के साथ नियमित रूप से श्री सूर्य चालीसा का पाठ करते हैं, वे अपने जीवन में नई ऊर्जा, सकारात्मक सोच, आत्मबल और आध्यात्मिक शांति का अनुभव करते हैं। भगवान सूर्य की कृपा हमें सदैव ज्ञान, सत्य, परिश्रम और उज्ज्वल जीवन के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।
अब आइए, श्री सूर्य चालीसा से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण प्रश्नों के उत्तर जानते हैं, जो श्रद्धालुओं द्वारा अक्सर पूछे जाते हैं।
श्री सूर्य चालीसा से जुड़े सामान्य प्रश्न (FAQs)
1. श्री सूर्य चालीसा का पाठ किस दिन करना सबसे शुभ माना जाता है?
रविवार भगवान सूर्य नारायण को समर्पित माना जाता है। इसके अतिरिक्त रथ सप्तमी, मकर संक्रांति और छठ पूजा जैसे पावन अवसरों पर भी श्री सूर्य चालीसा का पाठ विशेष रूप से शुभ माना जाता है।
2. क्या श्री सूर्य चालीसा का पाठ प्रतिदिन किया जा सकता है?
हाँ, श्रद्धा और विश्वास के साथ प्रतिदिन श्री सूर्य चालीसा का पाठ किया जा सकता है। नियमित पाठ व्यक्ति को अनुशासित जीवन, सकारात्मक सोच और आत्मबल विकसित करने की प्रेरणा देता है।
3. श्री सूर्य चालीसा पढ़ने का सबसे अच्छा समय कौन-सा है?
प्रातःकाल सूर्योदय के समय भगवान सूर्य को अर्घ्य अर्पित करने के बाद श्री सूर्य चालीसा का पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
4. क्या घर में श्री सूर्य चालीसा का पाठ किया जा सकता है?
हाँ, घर के पूजा स्थान पर या पूर्व दिशा की ओर मुख करके श्रद्धापूर्वक श्री सूर्य चालीसा का पाठ किया जा सकता है।
5. क्या महिलाएँ और पुरुष दोनों श्री सूर्य चालीसा का पाठ कर सकते हैं?
हाँ, स्त्री, पुरुष, युवा, बुजुर्ग और विद्यार्थी सभी श्रद्धा एवं भक्ति के साथ श्री सूर्य चालीसा का पाठ कर सकते हैं।
6. क्या श्री सूर्य चालीसा पढ़ने से पहले भगवान सूर्य को जल अर्पित करना आवश्यक है?
यदि संभव हो तो तांबे के पात्र से भगवान सूर्य को अर्घ्य अर्पित करना शुभ माना जाता है। यदि ऐसा संभव न हो तो श्रद्धापूर्वक चालीसा का पाठ भी किया जा सकता है।
7. क्या रविवार के दिन श्री सूर्य चालीसा का विशेष महत्व है?
हाँ, रविवार भगवान सूर्य का दिन माना जाता है। इस दिन श्रद्धापूर्वक श्री सूर्य चालीसा का पाठ और सूर्य उपासना विशेष फलदायी मानी जाती है।
8. क्या विद्यार्थी श्री सूर्य चालीसा का पाठ कर सकते हैं?
हाँ, विद्यार्थी श्रद्धा के साथ श्री सूर्य चालीसा का पाठ कर सकते हैं। यह उन्हें अनुशासन, आत्मविश्वास और नियमित अध्ययन के लिए प्रेरित करती है।
9. क्या श्री सूर्य चालीसा का पाठ पूरे परिवार के साथ किया जा सकता है?
हाँ, परिवार के सभी सदस्य मिलकर श्री सूर्य चालीसा का पाठ कर सकते हैं। इससे घर में सकारात्मक वातावरण और आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव होता है।
10. क्या श्री सूर्य चालीसा केवल विशेष अवसरों पर ही पढ़नी चाहिए?
नहीं, इसे केवल पर्वों पर ही नहीं बल्कि दैनिक पूजा और आध्यात्मिक साधना के रूप में भी पढ़ा जा सकता है।
11. क्या भगवान सूर्य स्वास्थ्य और ऊर्जा के देवता माने जाते हैं?
हाँ, वैदिक परंपरा में भगवान सूर्य को स्वास्थ्य, जीवन शक्ति, तेज और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना गया है।
12. क्या श्री सूर्य चालीसा का नियमित पाठ आध्यात्मिक साधना का भाग बन सकता है?
हाँ, नियमित रूप से श्री सूर्य चालीसा का पाठ करने से ईश्वर के प्रति श्रद्धा बढ़ती है तथा व्यक्ति अनुशासित और सकारात्मक जीवन जीने की प्रेरणा प्राप्त करता है।
13. क्या सूर्य नमस्कार और श्री सूर्य चालीसा साथ में किए जा सकते हैं?
हाँ, अनेक श्रद्धालु प्रातःकाल सूर्य नमस्कार करने के बाद भगवान सूर्य को अर्घ्य अर्पित कर श्रद्धापूर्वक श्री सूर्य चालीसा का पाठ करते हैं।
14. क्या श्री सूर्य चालीसा पढ़ने के लिए किसी विशेष मंत्र का ज्ञान आवश्यक है?
नहीं, श्रद्धा, विश्वास और एकाग्र मन के साथ श्री सूर्य चालीसा का पाठ करना ही पर्याप्त माना जाता है।
15. श्री सूर्य चालीसा का मुख्य संदेश क्या है?
श्री सूर्य चालीसा का मुख्य संदेश अनुशासन, परिश्रम, समय का सम्मान, आत्मविश्वास, सकारात्मक सोच और धर्म के मार्ग पर निरंतर आगे बढ़ना है।
निष्कर्ष
श्री सूर्य चालीसा भगवान सूर्य नारायण की दिव्य महिमा, प्रकाश, ऊर्जा और जीवनदायी स्वरूप का पवित्र स्तवन है। श्रद्धा और विश्वास के साथ इसका नियमित पाठ करने से व्यक्ति के भीतर आत्मबल, सकारात्मक सोच, अनुशासन और आध्यात्मिक जागरूकता विकसित होती है। यह चालीसा हमें प्रतिदिन नए उत्साह, नई ऊर्जा और अच्छे कर्मों के साथ जीवन जीने की प्रेरणा देती है।
भगवान सूर्य हमें सिखाते हैं कि निरंतर कर्म, समय का सम्मान, सत्य और परिश्रम ही जीवन की वास्तविक सफलता का आधार हैं। उनका दिव्य प्रकाश केवल संसार को ही नहीं बल्कि हमारे मन और विचारों को भी प्रकाशित करने का संदेश देता है।
यदि आप श्रद्धा, नियमितता और पूर्ण विश्वास के साथ श्री सूर्य चालीसा का पाठ करते हैं, तो यह आपकी दैनिक आध्यात्मिक साधना का महत्वपूर्ण भाग बन सकता है तथा आपको आत्मविश्वास, अनुशासन और सकारात्मक जीवन की दिशा में निरंतर प्रेरित करता रहेगा।
॥ जय सूर्य नारायण भगवान ॥
॥ ॐ घृणिः सूर्याय नमः ॥
श्री कृष्ण चालीसा (Krishna Chalisa)
श्री कुबेर चालीसा (Kuber Chalisa)
श्री पार्वती चालीसा (Parvati Chalisa)
दुर्गा चालीसा (Durga Chalisa)
श्री गणेश चालीसा (Ganesh Chalisa)
श्री कार्तिकेय चालीसा (Kartikeya Chalisa)