
श्री नरसिंह चालीसा
श्री नरसिंह चालीसा भगवान श्री नरसिंह को समर्पित एक अत्यंत पवित्र और शक्तिशाली स्तुति है। भगवान नरसिंह, भगवान विष्णु के चौथे अवतार माने जाते हैं। उन्होंने भक्त प्रह्लाद की रक्षा करने तथा अधर्म और अत्याचार का अंत करने के लिए आधे मनुष्य और आधे सिंह के दिव्य स्वरूप में अवतार धारण किया। श्रद्धा और विश्वास के साथ श्री नरसिंह चालीसा का नियमित पाठ करने से मन में साहस, आत्मबल, निर्भयता और भगवान के प्रति अटूट श्रद्धा का विकास होता है।
भगवान नरसिंह का अवतार यह संदेश देता है कि जब भी धर्म पर संकट आता है और भक्त सच्चे मन से ईश्वर का स्मरण करता है, तब भगवान उसकी रक्षा के लिए अवश्य प्रकट होते हैं। उनका उग्र स्वरूप अधर्म के विनाश और धर्म की स्थापना का प्रतीक माना जाता है, जबकि अपने भक्तों के प्रति उनका हृदय अत्यंत करुणामय और दयालु माना जाता है।
श्री नरसिंह चालीसा क्या है?
श्री नरसिंह चालीसा चालीस चौपाइयों और दोहों से युक्त एक पवित्र स्तोत्र है, जिसमें भगवान नरसिंह की दिव्य महिमा, भक्त प्रह्लाद के प्रति उनकी करुणा, धर्म की रक्षा और अधर्म के विनाश का सुंदर वर्णन किया गया है। यह चालीसा भक्तों के मन में साहस, विश्वास, धर्म और ईश्वर के प्रति समर्पण की भावना विकसित करती है।
श्री नरसिंह चालीसा का नियमित पाठ केवल भगवान की स्तुति नहीं है, बल्कि जीवन में सत्य, न्याय, निर्भयता और सदाचार के मार्ग पर चलने का आध्यात्मिक संकल्प भी है। यह भक्त को कठिन परिस्थितियों में भी ईश्वर पर विश्वास बनाए रखने की प्रेरणा देती है।
श्री नरसिंह चालीसा का महत्व
सनातन धर्म में भगवान नरसिंह को धर्म की रक्षा करने वाले, भक्तों के रक्षक और अन्याय का अंत करने वाले भगवान के रूप में पूजा जाता है। उन्होंने यह सिद्ध किया कि सच्चे भक्त की रक्षा के लिए भगवान किसी भी रूप में प्रकट हो सकते हैं। इसी कारण श्री नरसिंह चालीसा का पाठ भक्तों के लिए साहस, सुरक्षा और आध्यात्मिक शक्ति का महत्वपूर्ण माध्यम माना जाता है।
विशेष रूप से नरसिंह जयंती, वैष्णव पर्व, गुरुवार, एकादशी तथा भगवान विष्णु की आराधना के अवसरों पर श्री नरसिंह चालीसा का पाठ अत्यंत शुभ माना जाता है। अनेक श्रद्धालु प्रतिदिन भी श्रद्धापूर्वक इसका पाठ करते हैं।
यह चालीसा हमें यह प्रेरणा देती है कि सत्य और धर्म के मार्ग पर चलने वाले व्यक्ति को कभी भयभीत नहीं होना चाहिए, क्योंकि ईश्वर सदैव अपने भक्तों के साथ रहते हैं।
श्री नरसिंह चालीसा के लाभ
- भगवान नरसिंह के प्रति श्रद्धा और भक्ति मजबूत होती है।
- मन में साहस, आत्मविश्वास और निर्भयता का विकास होता है।
- आध्यात्मिक साधना और ईश्वर के प्रति विश्वास बढ़ता है।
- धर्म, सत्य और न्याय के मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है।
- नकारात्मक विचारों पर विजय पाने का आत्मबल प्राप्त होता है।
- मानसिक शांति और सकारात्मक सोच विकसित होती है।
- जीवन की कठिन परिस्थितियों का धैर्यपूर्वक सामना करने की प्रेरणा मिलती है।
- सदाचार, सेवा और विनम्रता जैसे गुणों का विकास होता है।
- भक्ति और आत्मसमर्पण की भावना मजबूत होती है।
- भगवान नरसिंह की कृपा से आध्यात्मिक शक्ति और आत्मविश्वास का अनुभव होता है।
श्री नरसिंह चालीसा कब पढ़नी चाहिए?
श्री नरसिंह चालीसा का पाठ प्रतिदिन किया जा सकता है, लेकिन प्रातःकाल और सायंकाल का समय विशेष रूप से शुभ माना जाता है। नरसिंह जयंती, एकादशी, गुरुवार तथा भगवान विष्णु की विशेष पूजा के अवसर पर इसका पाठ अत्यंत मंगलकारी माना जाता है।
जो श्रद्धालु भगवान विष्णु तथा उनके अवतारों की उपासना करते हैं, वे अपनी दैनिक पूजा में भी श्री नरसिंह चालीसा का नियमित पाठ कर सकते हैं।
श्री नरसिंह चालीसा पढ़ने की विधि
- प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ एवं सात्विक वस्त्र धारण करें।
- भगवान नरसिंह या भगवान विष्णु की प्रतिमा अथवा चित्र स्थापित करें।
- घी का दीपक और धूप जलाएँ।
- पीले पुष्प, तुलसी दल तथा फल श्रद्धापूर्वक अर्पित करें।
- कुछ समय तक भगवान नरसिंह का ध्यान करें।
- पूर्ण श्रद्धा और एकाग्रता के साथ श्री नरसिंह चालीसा का पाठ करें।
- अपने परिवार, समाज और समस्त प्राणियों के कल्याण की प्रार्थना करें।
- पाठ के अंत में भगवान की आरती करें और प्रसाद वितरित करें।
श्री नरसिंह चालीसा का पाठ करने से पहले ध्यान रखने योग्य बातें
- मन, वचन और कर्म की पवित्रता बनाए रखें।
- पूजा के समय मन को शांत और एकाग्र रखें।
- जहाँ तक संभव हो सात्विक जीवनशैली अपनाएँ।
- सत्य, न्याय और धर्म का पालन करने का संकल्प लें।
- क्रोध, अहंकार और अन्याय से दूर रहने का प्रयास करें।
- भगवान के प्रति पूर्ण श्रद्धा और विश्वास बनाए रखें।
- नियमित रूप से श्री नरसिंह चालीसा का पाठ करें और सदैव अच्छे कर्म करने का प्रयास करें।
अब आइए, पूर्ण श्रद्धा, भक्ति और समर्पण के साथ सम्पूर्ण श्री नरसिंह चालीसा का पाठ करें तथा भगवान नरसिंह की दिव्य कृपा, संरक्षण और आशीर्वाद प्राप्त करें।
सम्पूर्ण श्री नरसिंह चालीसा
अब श्रद्धा, विश्वास और पूर्ण समर्पण के साथ भगवान श्री नरसिंह का ध्यान करें तथा श्री नरसिंह चालीसा का पाठ करें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान नरसिंह भगवान विष्णु के चौथे अवतार हैं, जिन्होंने भक्त प्रह्लाद की रक्षा और अधर्म के विनाश के लिए दिव्य रूप धारण किया। श्रद्धापूर्वक किया गया यह पाठ मन में साहस, निर्भयता, धर्मनिष्ठा और भगवान के प्रति अटूट विश्वास को मजबूत करने की प्रेरणा देता है।
॥ दोहा ॥
जय नरसिंह भगवान प्रभु, भक्तन के रखवारे।
धर्म रक्षा हित प्रकटे, दुष्ट दलन तुम प्यारे॥
प्रह्लाद हित अवतार धरि, हरि की महिमा गाइ।
भय संकट सब दूर हों, कृपा दृष्टि बरसाइ॥
॥ चौपाई ॥
जय जय नरसिंह भगवाना।
भक्त जनों के रखवाना॥
विष्णु रूप अवतार तुम्हारा।
धर्म रक्षा हित अवतारा॥
प्रह्लाद के संकट हारे।
भक्त सदा तुमको प्यारे॥
हिरण्यकशिपु दुष्ट संहारा।
धर्म ध्वजा जग में पसारा॥
करुणा सागर दीन दयाला।
राखो लाज जन प्रतिपाला॥
जो जन श्रद्धा सहित ध्यावे।
मनवांछित फल सहजहि पावे॥
भय संकट सब दूर भगावो।
मन में साहस शक्ति जगावो॥
सत्य धर्म का मार्ग बतावो।
जीवन सफल सदा बनावो॥
दीन दुखी पर दया दिखावो।
सुख शांति जीवन में लावो॥
क्रोध अहं सब दूर करावो।
भक्ति भाव मन में बसावो॥
प्रेम प्रकाश हृदय में भर दो।
सद्बुद्धि का वरदान कर दो॥
जो नित हरि गुणगान करावे।
जीवन में आनंद पावे॥
संकट सब प्रभु हर लेते।
भक्तों पर कृपा बरसाते॥
भवसागर से पार लगावो।
अपने चरणन में बसावो॥
धर्म विजय का संदेश सुनावो।
अधर्म का अंत करावो॥
सत्य न्याय के तुम रखवाले।
सब पर कृपा करने वाले॥
शक्ति साहस मन में दीजै।
भक्ति का वरदान दीजै॥
जय जय नरहरि भगवाना।
सबके अंतर्यामी नाना॥
भक्त पुकार सुनो भगवाना।
पूरण कर दो शुभ अरमाना॥
कृपा दृष्टि हम पर बरसाओ।
जीवन मंगलमय बनाओ॥
॥ समापन दोहा ॥
जो यह नरसिंह चालीसा, श्रद्धा सहित पढ़ाय।
हरि कृपा से भक्त जन, सुख-समृद्धि सब पाय॥
जय श्री नरसिंह भगवान।
जय श्री हरि नारायण॥
श्री नरसिंह चालीसा का नियमित पाठ क्यों करें?
श्री नरसिंह चालीसा का नियमित पाठ भगवान नरसिंह की दिव्य शक्ति, धर्म रक्षा और भक्तवत्सल स्वरूप का स्मरण कराता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्रद्धा और विश्वास के साथ किया गया यह पाठ मन में साहस, आत्मविश्वास, धर्म के प्रति निष्ठा और सकारात्मक सोच विकसित करने की प्रेरणा देता है। भगवान नरसिंह अपने भक्तों को अन्याय का विरोध करने, सत्य का साथ देने और हर परिस्थिति में ईश्वर पर विश्वास बनाए रखने का संदेश देते हैं।
अब जब आपने श्रद्धापूर्वक सम्पूर्ण श्री नरसिंह चालीसा का पाठ कर लिया है, आइए अगले भाग में इसकी प्रत्येक चौपाई का सरल भावार्थ और आध्यात्मिक महत्व विस्तार से समझते हैं।
श्री नरसिंह चालीसा का भावार्थ
श्री नरसिंह चालीसा भगवान श्री नरसिंह की दिव्य शक्ति, धर्म की रक्षा और भक्तों के प्रति उनकी असीम करुणा का वर्णन करने वाला एक अत्यंत पवित्र स्तोत्र है। इसकी प्रत्येक चौपाई यह संदेश देती है कि भगवान अपने सच्चे भक्तों की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहते हैं। भगवान नरसिंह का अवतार यह सिद्ध करता है कि जब धर्म पर संकट आता है और भक्त पूर्ण श्रद्धा के साथ भगवान का स्मरण करता है, तब ईश्वर स्वयं उसकी रक्षा के लिए किसी भी रूप में प्रकट हो सकते हैं।
श्री नरसिंह चालीसा का नियमित पाठ केवल भगवान की स्तुति नहीं है, बल्कि जीवन में साहस, सत्य, धर्म और न्याय का पालन करने की प्रेरणा भी देता है। यह भक्त के मन से भय, निराशा और नकारात्मक विचारों को दूर कर आत्मविश्वास तथा आध्यात्मिक शक्ति विकसित करने का माध्यम माना जाता है।
भगवान नरसिंह का दिव्य स्वरूप
भगवान नरसिंह भगवान विष्णु के चौथे अवतार हैं। उनका आधा मनुष्य और आधा सिंह स्वरूप अद्भुत एवं दिव्य माना जाता है। यह स्वरूप इस बात का प्रतीक है कि ईश्वर की शक्ति किसी भी सीमा में बंधी नहीं होती। भगवान नरसिंह का उग्र रूप अधर्म, अन्याय और अहंकार के विनाश का प्रतीक है, जबकि अपने भक्तों के प्रति उनका स्वरूप अत्यंत दयालु और करुणामय माना जाता है।
भगवान नरसिंह हमें यह सिखाते हैं कि शक्ति का उपयोग सदैव धर्म की रक्षा, निर्दोषों की सुरक्षा और सत्य की स्थापना के लिए होना चाहिए।
भक्त प्रह्लाद की कथा का संदेश
भगवान नरसिंह के अवतार का सबसे महत्वपूर्ण प्रसंग भक्त प्रह्लाद की रक्षा है। प्रह्लाद ने कठिन परिस्थितियों में भी भगवान विष्णु के प्रति अपनी श्रद्धा नहीं छोड़ी। उनके अटूट विश्वास और भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान नरसिंह प्रकट हुए और उन्होंने हिरण्यकशिपु का अंत करके अपने भक्त की रक्षा की।
यह कथा हमें सिखाती है कि सच्ची श्रद्धा, धैर्य और ईश्वर पर विश्वास रखने वाला व्यक्ति अंततः भगवान की कृपा का पात्र बनता है।
श्री नरसिंह चालीसा का आध्यात्मिक संदेश
श्री नरसिंह चालीसा का मुख्य संदेश यह है कि जीवन में कभी भी सत्य और धर्म का साथ नहीं छोड़ना चाहिए। भगवान नरसिंह हमें प्रेरणा देते हैं कि कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी साहस बनाए रखें, अन्याय का विरोध करें और सदैव ईश्वर पर विश्वास रखें।
यह चालीसा हमें यह भी सिखाती है कि भय पर विजय पाने का सबसे बड़ा उपाय श्रद्धा, आत्मविश्वास और भगवान के प्रति पूर्ण समर्पण है।
साहस और धर्म का महत्व
भगवान नरसिंह का सम्पूर्ण जीवन धर्म की रक्षा और अधर्म के विनाश का संदेश देता है। वे हमें यह सिखाते हैं कि सत्य का मार्ग कठिन हो सकता है, लेकिन अंततः विजय धर्म और सत्य की ही होती है।
श्री नरसिंह चालीसा का नियमित पाठ व्यक्ति के भीतर साहस, आत्मबल, संयम और न्यायप्रियता जैसे गुणों का विकास करने की प्रेरणा देता है।
नियमित पाठ का महत्व
प्रतिदिन अथवा विशेष रूप से नरसिंह जयंती, एकादशी, गुरुवार तथा भगवान विष्णु की विशेष पूजा के अवसर पर श्री नरसिंह चालीसा का पाठ करना शुभ माना जाता है। नियमित पाठ से मन में श्रद्धा, आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच का विकास होता है तथा व्यक्ति अपने जीवन में धर्म और सदाचार का पालन करने के लिए प्रेरित होता है।
श्रद्धा और विश्वास के साथ किया गया यह पाठ मानसिक शांति, आध्यात्मिक शक्ति और ईश्वर के प्रति समर्पण की भावना को मजबूत करने का माध्यम माना जाता है।
भगवान नरसिंह की कृपा प्राप्त करने के सरल उपाय
- प्रतिदिन या विशेष पर्वों पर श्रद्धापूर्वक श्री नरसिंह चालीसा का पाठ करें।
- भगवान विष्णु और भगवान नरसिंह का ध्यान एवं पूजा करें।
- तुलसी दल, पीले पुष्प और सात्विक भोग अर्पित करें।
- सत्य, न्याय और धर्म का सदैव पालन करें।
- निर्बलों की सहायता करें और अन्याय का विरोध करें।
- क्रोध, अहंकार और छल-कपट से दूर रहने का प्रयास करें।
- ईश्वर पर पूर्ण श्रद्धा और विश्वास बनाए रखते हुए अच्छे कर्म करें।
श्री नरसिंह चालीसा से मिलने वाली प्रेरणा
श्री नरसिंह चालीसा हमें यह सिखाती है कि ईश्वर सदैव अपने भक्तों के साथ रहते हैं। जो व्यक्ति सत्य, धर्म और भक्ति के मार्ग पर चलता है, उसे किसी भी परिस्थिति में भयभीत होने की आवश्यकता नहीं होती। भगवान नरसिंह अपने भक्तों को साहस, आत्मविश्वास और धर्म की रक्षा के लिए सदैव प्रेरित करते हैं।
जो भक्त श्रद्धा और समर्पण के साथ नियमित रूप से श्री नरसिंह चालीसा का पाठ करते हैं, वे अपने जीवन में मानसिक शांति, निर्भयता, सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक शक्ति का अनुभव करते हैं। भगवान नरसिंह की कृपा हमें सदैव सत्य, न्याय, धर्म और मानवता के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।
अब आइए, श्री नरसिंह चालीसा से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण प्रश्नों के उत्तर जानते हैं, जो श्रद्धालुओं द्वारा अक्सर पूछे जाते हैं।
श्री नरसिंह चालीसा से जुड़े सामान्य प्रश्न (FAQs)
1. श्री नरसिंह चालीसा का पाठ किस दिन करना सबसे शुभ माना जाता है?
भगवान नरसिंह की आराधना प्रतिदिन की जा सकती है, लेकिन नरसिंह जयंती, एकादशी, गुरुवार तथा भगवान विष्णु से संबंधित विशेष पर्वों पर इसका पाठ विशेष रूप से शुभ माना जाता है।
2. क्या श्री नरसिंह चालीसा का पाठ प्रतिदिन किया जा सकता है?
हाँ, श्रद्धा और विश्वास के साथ प्रतिदिन श्री नरसिंह चालीसा का पाठ किया जा सकता है। नियमित पाठ मन में साहस, आत्मविश्वास और भगवान के प्रति अटूट श्रद्धा विकसित करने की प्रेरणा देता है।
3. श्री नरसिंह चालीसा पढ़ने का सबसे अच्छा समय कौन-सा है?
प्रातःकाल स्नान के बाद अथवा सायंकाल शांत वातावरण में भगवान नरसिंह का ध्यान करते हुए चालीसा का पाठ करना शुभ माना जाता है।
4. क्या घर में श्री नरसिंह चालीसा का पाठ किया जा सकता है?
हाँ, घर के पूजा स्थान पर भगवान नरसिंह या भगवान विष्णु की प्रतिमा अथवा चित्र के समक्ष श्रद्धा और एकाग्रता के साथ इसका पाठ किया जा सकता है।
5. क्या महिलाएँ और पुरुष दोनों श्री नरसिंह चालीसा का पाठ कर सकते हैं?
हाँ, भगवान नरसिंह की कृपा सभी भक्तों पर समान रूप से मानी जाती है। स्त्री, पुरुष, युवा, बुजुर्ग और बच्चे सभी श्रद्धापूर्वक इसका पाठ कर सकते हैं।
6. क्या श्री नरसिंह चालीसा पढ़ने से पहले भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए?
यदि संभव हो तो भगवान विष्णु और भगवान नरसिंह का ध्यान करके दीपक, धूप, तुलसी दल और पुष्प अर्पित करें। इसके बाद श्रद्धापूर्वक श्री नरसिंह चालीसा का पाठ करना शुभ माना जाता है।
7. क्या नरसिंह जयंती के दिन श्री नरसिंह चालीसा का विशेष महत्व है?
हाँ, नरसिंह जयंती भगवान नरसिंह के अवतरण का पावन पर्व है। इस दिन श्रद्धापूर्वक श्री नरसिंह चालीसा का पाठ अत्यंत शुभ और मंगलकारी माना जाता है।
8. क्या परिवार के सभी सदस्य मिलकर श्री नरसिंह चालीसा का पाठ कर सकते हैं?
हाँ, परिवार के साथ सामूहिक रूप से श्री नरसिंह चालीसा का पाठ करने से घर में भक्तिमय, सकारात्मक और आध्यात्मिक वातावरण का अनुभव होता है।
9. क्या विद्यार्थी भी श्री नरसिंह चालीसा का पाठ कर सकते हैं?
हाँ, विद्यार्थी श्रद्धा और विश्वास के साथ इसका पाठ कर सकते हैं। यह उन्हें साहस, आत्मविश्वास, अनुशासन और सकारात्मक सोच की प्रेरणा देता है।
10. क्या श्री नरसिंह चालीसा केवल विशेष पर्वों पर ही पढ़नी चाहिए?
नहीं, इसे केवल पर्वों पर ही नहीं बल्कि प्रतिदिन की पूजा और आध्यात्मिक साधना के रूप में भी पढ़ा जा सकता है।
11. भगवान नरसिंह का अवतार क्यों हुआ था?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान विष्णु ने भक्त प्रह्लाद की रक्षा करने तथा हिरण्यकशिपु के अत्याचार का अंत कर धर्म की स्थापना के लिए नरसिंह अवतार धारण किया था।
12. क्या श्री नरसिंह चालीसा का नियमित पाठ आध्यात्मिक साधना का भाग बन सकता है?
हाँ, नियमित रूप से इसका पाठ करने से श्रद्धा, आत्मबल, मानसिक शांति और भगवान के प्रति समर्पण की भावना मजबूत होती है।
13. क्या भगवान नरसिंह भक्तों की रक्षा करने वाले देवता माने जाते हैं?
हाँ, भगवान नरसिंह को भक्तवत्सल और धर्मरक्षक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार वे अपने भक्तों की रक्षा करते हैं और उन्हें सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं।
14. क्या श्री नरसिंह चालीसा किसी भी आयु का व्यक्ति पढ़ सकता है?
हाँ, बच्चे, युवा, गृहस्थ, साधक और बुजुर्ग सभी श्रद्धा और विश्वास के साथ श्री नरसिंह चालीसा का पाठ कर सकते हैं।
15. श्री नरसिंह चालीसा का मुख्य संदेश क्या है?
श्री नरसिंह चालीसा का मुख्य संदेश सत्य, धर्म, साहस, निर्भयता, ईश्वर पर अटूट विश्वास और सदाचार के मार्ग पर चलना है। यह हमें सिखाती है कि भगवान सदैव अपने सच्चे भक्तों की रक्षा करते हैं।
निष्कर्ष
श्री नरसिंह चालीसा भगवान नरसिंह की दिव्य शक्ति, धर्म रक्षा और भक्तों के प्रति उनकी असीम करुणा का पवित्र स्तवन है। श्रद्धा और विश्वास के साथ इसका नियमित पाठ करने से मन में साहस, आत्मविश्वास, सकारात्मक सोच और आध्यात्मिक शांति विकसित होती है। यह चालीसा हमें सिखाती है कि जीवन में सत्य, धर्म और न्याय का साथ कभी नहीं छोड़ना चाहिए।
भगवान नरसिंह का जीवन प्रत्येक भक्त को यह प्रेरणा देता है कि कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी ईश्वर पर विश्वास बनाए रखें, अन्याय का विरोध करें और सदैव अच्छे कर्मों का अनुसरण करें। सच्ची श्रद्धा और दृढ़ विश्वास व्यक्ति को हर चुनौती का सामना करने की शक्ति प्रदान करते हैं।
यदि आप श्रद्धा, नियमितता और पूर्ण समर्पण के साथ श्री नरसिंह चालीसा का पाठ करते हैं, तो यह आपकी दैनिक आध्यात्मिक साधना का महत्वपूर्ण भाग बन सकता है तथा आपको साहस, मानसिक शांति, धर्मनिष्ठा और भगवान नरसिंह की दिव्य कृपा का अनुभव कराने में सहायक हो सकता है।
॥ जय श्री नरसिंह भगवान ॥
॥ ॐ नमो भगवते नरसिंहाय ॥
श्री खाटू श्याम चालीसा (Khatu Shyam Chalisa)
श्री शिव चालीसा (Shiv Chalisa)
श्री पार्वती चालीसा (Parvati Chalisa)
श्री गंगा चालीसा (Ganga Chalisa)
श्री नवग्रह चालीसा (Navgrah Chalisa)
श्री विष्णु चालीसा (Vishnu Chalisa)