
श्री शनि चालीसा
श्री शनि चालीसा न्याय के देवता और कर्मफलदाता भगवान श्री शनि देव को समर्पित एक अत्यंत पवित्र एवं प्रभावशाली स्तुति है। शनि देव को नवग्रहों में विशेष स्थान प्राप्त है और वे प्रत्येक व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार फल प्रदान करते हैं। श्रद्धा, विश्वास और विनम्रता के साथ श्री शनि चालीसा का नियमित पाठ करने से व्यक्ति के भीतर धैर्य, आत्मविश्वास, अनुशासन और अच्छे कर्म करने की प्रेरणा विकसित होती है।
भगवान शनि को सूर्यदेव और माता छाया के पुत्र माना जाता है। उनका स्वरूप न्याय, सत्य, कर्म और निष्पक्षता का प्रतीक है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शनि देव किसी के साथ पक्षपात नहीं करते, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार उचित फल प्रदान करते हैं। इसलिए उन्हें न्यायाधीश देवता भी कहा जाता है।
श्री शनि चालीसा क्या है?
श्री शनि चालीसा चालीस चौपाइयों और दोहों से युक्त एक पवित्र स्तोत्र है, जिसमें भगवान शनि देव के दिव्य स्वरूप, उनकी महिमा, न्यायप्रियता और भक्तों पर होने वाली उनकी कृपा का वर्णन किया गया है। यह चालीसा व्यक्ति को अपने कर्मों के प्रति जागरूक रहने, सत्य का पालन करने और धैर्य के साथ जीवन की चुनौतियों का सामना करने की प्रेरणा देती है।
श्री शनि चालीसा का नियमित पाठ केवल शनि देव की स्तुति नहीं है, बल्कि आत्मचिंतन, अनुशासन और अच्छे कर्मों के महत्व को समझने का एक आध्यात्मिक माध्यम भी है।
श्री शनि चालीसा का महत्व
भगवान शनि को कर्मफलदाता कहा जाता है क्योंकि वे मनुष्य के अच्छे और बुरे कर्मों का न्यायपूर्ण फल प्रदान करते हैं। शनि देव का उद्देश्य किसी को कष्ट देना नहीं, बल्कि व्यक्ति को सही मार्ग पर चलने और अपने कर्मों को सुधारने की प्रेरणा देना है।
शनिवार का दिन भगवान शनि की आराधना के लिए विशेष रूप से शुभ माना जाता है। इस दिन श्रद्धापूर्वक श्री शनि चालीसा का पाठ, तिल के तेल का दीपक जलाना, पीपल वृक्ष की पूजा करना तथा जरूरतमंद लोगों की सहायता करना धार्मिक दृष्टि से अत्यंत शुभ माना जाता है।
यह चालीसा हमें सिखाती है कि जीवन में सफलता केवल भाग्य से नहीं, बल्कि परिश्रम, ईमानदारी, धैर्य और अच्छे कर्मों से प्राप्त होती है।
श्री शनि चालीसा के लाभ
- भगवान शनि के प्रति श्रद्धा और विश्वास मजबूत होता है।
- धैर्य, अनुशासन और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है।
- जीवन में अच्छे कर्म करने की प्रेरणा मिलती है।
- मानसिक तनाव और नकारात्मक विचारों को कम करने में सहायता मिलती है।
- सत्य, न्याय और ईमानदारी के मार्ग पर चलने की प्रेरणा प्राप्त होती है।
- आध्यात्मिक साधना और ईश्वर के प्रति आस्था बढ़ती है।
- जीवन की कठिन परिस्थितियों का धैर्यपूर्वक सामना करने की शक्ति मिलती है।
- परिवार में सकारात्मक वातावरण और आपसी सम्मान बना रहता है।
- अपने कर्मों का आत्ममूल्यांकन करने की प्रेरणा मिलती है।
- भगवान शनि की कृपा से जीवन में संतुलन और आत्मिक शांति का अनुभव होता है।
श्री शनि चालीसा कब पढ़नी चाहिए?
यद्यपि श्री शनि चालीसा का पाठ किसी भी दिन श्रद्धा के साथ किया जा सकता है, लेकिन शनिवार का दिन भगवान शनि की पूजा के लिए सबसे अधिक शुभ माना जाता है। प्रातःकाल स्नान करके अथवा सायंकाल दीपक जलाकर श्रद्धापूर्वक चालीसा का पाठ किया जा सकता है।
शनि जयंती, अमावस्या के दिन पड़ने वाला शनिवार तथा विशेष रूप से शनि मंदिर में दर्शन के समय भी इस चालीसा का पाठ अत्यंत शुभ माना जाता है। नियमित रूप से शनिवार को इसका पाठ करने की परंपरा भी अनेक भक्तों द्वारा निभाई जाती है।
श्री शनि चालीसा पढ़ने की विधि
- शनिवार के दिन प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- भगवान शनि देव की प्रतिमा या चित्र के सामने पूजा स्थान तैयार करें।
- तिल के तेल का दीपक जलाएँ और धूप अर्पित करें।
- काले तिल, नीले या गहरे रंग के पुष्प तथा यदि संभव हो तो सरसों का तेल अर्पित करें।
- कुछ समय तक भगवान शनि का ध्यान करें।
- पूर्ण श्रद्धा और एकाग्रता के साथ श्री शनि चालीसा का पाठ करें।
- अपने जीवन में सद्कर्म, न्याय और धैर्य बनाए रखने की प्रार्थना करें।
- पाठ के अंत में शनि देव की आरती करें और प्रसाद वितरित करें।
श्री शनि चालीसा का पाठ करने से पहले ध्यान रखने योग्य बातें
- मन, वचन और कर्म की पवित्रता बनाए रखें।
- भगवान शनि का स्मरण भय से नहीं बल्कि श्रद्धा और विश्वास के साथ करें।
- अपने जीवन में सत्य, ईमानदारी और न्याय का पालन करने का संकल्प लें।
- किसी के साथ अन्याय या छल-कपट न करें।
- जरूरतमंद लोगों की सहायता और सेवा का भाव रखें।
- क्रोध, अहंकार और लालच से दूर रहने का प्रयास करें।
- नियमित रूप से श्री शनि चालीसा का पाठ कर भगवान शनि की कृपा प्राप्त करने का प्रयास करें।
अब आइए, श्रद्धा, धैर्य और पूर्ण विश्वास के साथ सम्पूर्ण श्री शनि चालीसा का पाठ करें तथा भगवान शनि देव की दिव्य कृपा और आशीर्वाद प्राप्त करें।
सम्पूर्ण श्री शनि चालीसा
अब श्रद्धा, धैर्य और पूर्ण विश्वास के साथ भगवान श्री शनि देव का ध्यान करें तथा श्री शनि चालीसा का पाठ करें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शनि न्याय, कर्म और सत्य के अधिष्ठाता हैं। सच्चे मन से किया गया यह पाठ व्यक्ति को आत्मचिंतन, अनुशासन और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
॥ दोहा ॥
जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल करन कृपाल।
दीनन के दुःख दूर कर, जय जय श्री शनिदेव दयाल॥
सूर्य पुत्र छाया तनय, न्याय करो भगवान।
कर्म अनुसार फल दीजिए, राखो भक्त की शान॥
॥ चौपाई ॥
जय जय श्री शनिदेव महाराज।
करहु कृपा जन पर आज॥
सूर्यपुत्र छाया के नंदन।
भक्त जनों के दुःख निकंदन॥
नीलाम्बर तन अति सुखकारी।
करहु कृपा हे जग हितकारी॥
हाथ दंड कर न्याय करावा।
सत्य मार्ग सबको बतलावा॥
कर्म अनुसार फल तुम दीन्हा।
जग में न्याय महान कीन्हा॥
जो जन श्रद्धा सहित ध्यावे।
संकट सब उसके मिट जावे॥
दीन दुखी पर दया दिखावो।
जीवन में सुख शांति लावो॥
अहंकार सब दूर भगावो।
सद्बुद्धि का दान दिलावो॥
भय भ्रम सब हरि लेवहु स्वामी।
राखहु सदा लाज अभिरामी॥
तिल तेल दीपक जो जलावै।
शनि कृपा वह सहजहि पावै॥
पीपल पूजन जो नर करहीं।
शुभ फल जीवन भर वे धरहीं॥
दान धर्म जो नित अपनावै।
शनि कृपा वह सहजहि पावै॥
सत्य धर्म का पालन कीजै।
जीवन अपना सफल बनाईजै॥
क्रोध लोभ सब दूर भगावो।
मन में धैर्य प्रकाश जगावो॥
भक्त पुकार सुनो भगवान।
पूरण कर दो सब अरमान॥
कष्ट हरो हे न्याय अधीशा।
राखो सदा अपनी शरणा॥
जो जन नित गुणगान करावै।
सुख समृद्धि जीवन में पावै॥
भवसागर से पार लगावो।
अपने चरणन में बसावो॥
जय जय जय शनिदेव दयाला।
भक्त जनों के तुम रखवाला॥
सदा रहो तुम साथ हमारे।
पूरण कर दो काज हमारे॥
॥ समापन दोहा ॥
जो यह शनि चालीसा, श्रद्धा सहित पढ़ाय।
शनि कृपा से भक्त जन, सुख-समृद्धि सब पाय॥
जय जय श्री शनिदेव।
कृपा करो भगवान॥
श्री शनि चालीसा का नियमित पाठ क्यों करें?
श्री शनि चालीसा का नियमित पाठ भगवान शनि देव के न्याय, अनुशासन और कर्मफल के सिद्धांतों का स्मरण कराता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्रद्धा और विनम्रता के साथ किया गया यह पाठ व्यक्ति को अच्छे कर्म करने, धैर्य बनाए रखने और जीवन में सत्य एवं न्याय के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। भगवान शनि की कृपा से व्यक्ति अपने कर्मों का सही मूल्य समझता है और आत्मिक विकास की ओर अग्रसर होता है।
अब जब आपने श्रद्धापूर्वक सम्पूर्ण श्री शनि चालीसा का पाठ कर लिया है, आइए अगले भाग में इसकी प्रत्येक चौपाई का सरल भावार्थ और आध्यात्मिक महत्व विस्तार से समझते हैं।
श्री शनि चालीसा का भावार्थ
श्री शनि चालीसा भगवान शनिदेव की महिमा, न्यायप्रियता और कर्मफल के सिद्धांत का वर्णन करने वाला एक अत्यंत पवित्र स्तोत्र है। इसकी प्रत्येक चौपाई भक्त को यह संदेश देती है कि मनुष्य का भविष्य उसके कर्मों पर आधारित होता है। भगवान शनिदेव किसी के शत्रु नहीं हैं, बल्कि वे निष्पक्ष न्यायाधीश हैं जो प्रत्येक व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार उचित फल प्रदान करते हैं। श्रद्धा और विश्वास के साथ श्री शनि चालीसा का नियमित पाठ करने से व्यक्ति के भीतर आत्मचिंतन, अनुशासन, धैर्य और सकारात्मक सोच का विकास होता है।
भगवान शनिदेव की आराधना का उद्देश्य केवल कठिनाइयों से मुक्ति प्राप्त करना नहीं है, बल्कि अपने जीवन को सत्य, न्याय और सदाचार के मार्ग पर आगे बढ़ाना भी है। यही कारण है कि श्री शनि चालीसा को आध्यात्मिक उन्नति और आत्मसुधार का महत्वपूर्ण साधन माना जाता है।
भगवान शनिदेव का दिव्य स्वरूप
भगवान शनिदेव सूर्यदेव और माता छाया के पुत्र हैं। उनका गहरा नील वर्ण, हाथ में दंड और उनकी गंभीर मुद्रा न्याय तथा अनुशासन का प्रतीक मानी जाती है। उनका वाहन कौआ या गिद्ध बताया गया है, जो सतर्कता और कर्मों के प्रति जागरूक रहने का संदेश देता है।
भगवान शनिदेव का स्वरूप हमें यह शिक्षा देता है कि जीवन में कोई भी कर्म व्यर्थ नहीं जाता। प्रत्येक अच्छे और बुरे कार्य का परिणाम निश्चित होता है, इसलिए सदैव सत्य, ईमानदारी और धर्म का पालन करना चाहिए।
कर्म और न्याय का महत्व
श्री शनि चालीसा का सबसे महत्वपूर्ण संदेश कर्म का सिद्धांत है। भगवान शनिदेव व्यक्ति के पद, धन या प्रतिष्ठा को नहीं देखते, बल्कि उसके कर्मों के आधार पर न्याय करते हैं। इसलिए यह चालीसा हमें सदैव अच्छे कार्य करने, दूसरों के प्रति सम्मान रखने और किसी के साथ अन्याय न करने की प्रेरणा देती है।
जब व्यक्ति अपने जीवन में अनुशासन, परिश्रम और ईमानदारी अपनाता है, तब भगवान शनिदेव की कृपा प्राप्त करने का मार्ग स्वयं खुलने लगता है।
श्री शनि चालीसा का आध्यात्मिक संदेश
श्री शनि चालीसा हमें यह सिखाती है कि कठिन समय भी जीवन का एक महत्वपूर्ण शिक्षक होता है। चुनौतियाँ मनुष्य को मजबूत, धैर्यवान और आत्मनिर्भर बनाती हैं। भगवान शनिदेव की कृपा से व्यक्ति अपने कर्मों पर विचार करता है और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का प्रयास करता है।
यह चालीसा हमें भय से नहीं, बल्कि श्रद्धा और विश्वास के साथ भगवान शनिदेव की आराधना करने की प्रेरणा देती है।
धैर्य और आत्मअनुशासन का महत्व
भगवान शनिदेव की उपासना व्यक्ति के भीतर धैर्य और आत्मसंयम विकसित करने में सहायक मानी जाती है। जीवन में कई बार सफलता देर से मिलती है, लेकिन निरंतर परिश्रम और सही दिशा में किए गए प्रयास अंततः अच्छे परिणाम देते हैं।
श्री शनि चालीसा हमें यह संदेश देती है कि कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य नहीं छोड़ना चाहिए और अपने कर्तव्यों का पालन पूरी निष्ठा के साथ करते रहना चाहिए।
सेवा और सदाचार का महत्व
भगवान शनिदेव की कृपा प्राप्त करने के लिए केवल पूजा-पाठ ही पर्याप्त नहीं माना गया है। जरूरतमंद लोगों की सहायता करना, बुजुर्गों का सम्मान करना, ईमानदारी से जीवन जीना और किसी के साथ अन्याय न करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
श्री शनि चालीसा हमें सेवा, दया, करुणा और सामाजिक जिम्मेदारी निभाने की प्रेरणा देती है। यही गुण व्यक्ति को आध्यात्मिक रूप से समृद्ध बनाते हैं।
नियमित पाठ का महत्व
प्रतिदिन अथवा विशेष रूप से शनिवार और शनि जयंती के दिन श्री शनि चालीसा का पाठ करना शुभ माना जाता है। नियमित पाठ से मन में सकारात्मक विचार उत्पन्न होते हैं, आत्मविश्वास बढ़ता है और व्यक्ति अपने कर्मों के प्रति अधिक जागरूक बनता है।
श्रद्धा और विश्वास के साथ किया गया पाठ मानसिक शांति, धैर्य और आध्यात्मिक संतुलन प्राप्त करने में सहायक माना जाता है।
भगवान शनिदेव की कृपा प्राप्त करने के सरल उपाय
- प्रत्येक शनिवार श्रद्धापूर्वक श्री शनि चालीसा का पाठ करें।
- भगवान शनिदेव का ध्यान करते हुए तिल के तेल का दीपक जलाएँ।
- जरूरतमंद लोगों की सहायता और दान-पुण्य करें।
- सत्य, न्याय और ईमानदारी को अपने जीवन का आधार बनाएँ।
- क्रोध, अहंकार और छल-कपट से दूर रहें।
- अपने माता-पिता, गुरु और बुजुर्गों का सम्मान करें।
- नियमित रूप से आत्मचिंतन करें और अपने कर्मों को बेहतर बनाने का प्रयास करें।
श्री शनि चालीसा से मिलने वाली प्रेरणा
श्री शनि चालीसा हमें यह सिखाती है कि मनुष्य का सबसे बड़ा धन उसके अच्छे कर्म हैं। भगवान शनिदेव हमें अनुशासन, धैर्य, सत्य, न्याय और ईमानदारी के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं। जो व्यक्ति अपने कर्मों को सुधारने का प्रयास करता है और दूसरों के साथ न्यायपूर्ण व्यवहार करता है, वही वास्तविक सुख और मानसिक शांति प्राप्त करता है।
श्रद्धा, विनम्रता और पूर्ण विश्वास के साथ नियमित रूप से श्री शनि चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति अपने जीवन में आत्मविश्वास, सकारात्मक सोच, आध्यात्मिक जागरूकता और अच्छे कर्मों के महत्व को समझने लगता है। भगवान शनिदेव की कृपा हमें सदैव सत्य और धर्म के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।
अब आइए, श्री शनि चालीसा से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण प्रश्नों के उत्तर जानते हैं, जो श्रद्धालुओं द्वारा अक्सर पूछे जाते हैं।
श्री शनि चालीसा से जुड़े सामान्य प्रश्न (FAQs)
1. श्री शनि चालीसा का पाठ किस दिन करना सबसे शुभ माना जाता है?
शनिवार का दिन भगवान शनिदेव की आराधना के लिए सबसे शुभ माना जाता है। इसके अतिरिक्त शनि जयंती और अमावस्या के दिन पड़ने वाला शनिवार भी विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है।
2. क्या श्री शनि चालीसा का पाठ प्रतिदिन किया जा सकता है?
हाँ, श्रद्धा और विश्वास के साथ प्रतिदिन श्री शनि चालीसा का पाठ किया जा सकता है। नियमित पाठ व्यक्ति को धैर्य, अनुशासन और अच्छे कर्मों की प्रेरणा देता है।
3. श्री शनि चालीसा पढ़ने का सबसे अच्छा समय कौन-सा है?
प्रातःकाल स्नान के बाद या शनिवार की संध्या के समय दीपक जलाकर भगवान शनिदेव का स्मरण करते हुए चालीसा का पाठ करना शुभ माना जाता है।
4. क्या घर में श्री शनि चालीसा का पाठ करना उचित है?
हाँ, घर के पूजा स्थान पर श्रद्धा, शुद्धता और एकाग्रता के साथ श्री शनि चालीसा का पाठ किया जा सकता है।
5. क्या महिलाएँ और पुरुष दोनों श्री शनि चालीसा का पाठ कर सकते हैं?
हाँ, भगवान शनिदेव सभी भक्तों पर समान कृपा करते हैं। स्त्री, पुरुष, युवा और बुजुर्ग सभी श्रद्धा के साथ इसका पाठ कर सकते हैं।
6. क्या श्री शनि चालीसा का पाठ करने से शनि दोष से राहत मिलती है?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्रद्धा, भक्ति और सद्कर्मों के साथ किया गया श्री शनि चालीसा का पाठ भगवान शनिदेव की कृपा प्राप्त करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम माना जाता है।
7. क्या शनिवार को तिल के तेल का दीपक जलाना शुभ माना जाता है?
हाँ, धार्मिक परंपराओं के अनुसार शनिवार के दिन भगवान शनिदेव के समक्ष तिल के तेल का दीपक जलाना शुभ माना जाता है।
8. क्या श्री शनि चालीसा पढ़ने से पहले पूजा करना आवश्यक है?
यदि संभव हो तो दीपक, धूप, काले तिल और पुष्प अर्पित करके भगवान शनिदेव की पूजा करें। यदि ऐसा संभव न हो तो स्वच्छ मन और श्रद्धा के साथ किया गया पाठ भी शुभ माना जाता है।
9. क्या परिवार के सभी सदस्य मिलकर श्री शनि चालीसा का पाठ कर सकते हैं?
हाँ, परिवार के साथ सामूहिक रूप से श्री शनि चालीसा का पाठ करने से घर में सकारात्मक वातावरण, अनुशासन और आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव होता है।
10. क्या विद्यार्थियों के लिए भी श्री शनि चालीसा लाभकारी मानी जाती है?
हाँ, यह चालीसा विद्यार्थियों को अनुशासन, परिश्रम, धैर्य और अपने लक्ष्यों के प्रति समर्पित रहने की प्रेरणा देती है।
11. क्या श्री शनि चालीसा का पाठ केवल शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या में ही करना चाहिए?
नहीं, श्री शनि चालीसा का पाठ केवल विशेष ग्रह दशाओं में ही नहीं बल्कि नियमित आध्यात्मिक साधना के रूप में भी किया जा सकता है।
12. क्या शनि देव केवल दंड देने वाले देवता हैं?
नहीं, भगवान शनिदेव न्याय के देवता हैं। वे व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार उचित फल प्रदान करते हैं और अच्छे कर्म करने की प्रेरणा देते हैं।
13. क्या श्री शनि चालीसा का नियमित पाठ आध्यात्मिक साधना का हिस्सा बन सकता है?
हाँ, नियमित रूप से इसका पाठ करने से आत्मचिंतन, धैर्य, अनुशासन और भगवान के प्रति श्रद्धा में वृद्धि होती है।
14. क्या श्री शनि चालीसा पढ़ने के साथ दान-पुण्य करना भी महत्वपूर्ण है?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जरूरतमंद लोगों की सहायता, सेवा और दान-पुण्य करना भगवान शनिदेव को प्रसन्न करने वाले श्रेष्ठ कार्यों में माना जाता है।
15. श्री शनि चालीसा का मुख्य संदेश क्या है?
श्री शनि चालीसा का मुख्य संदेश यह है कि प्रत्येक व्यक्ति को सत्य, न्याय, ईमानदारी और अच्छे कर्मों का पालन करना चाहिए, क्योंकि जीवन में मिलने वाले फल हमारे कर्मों पर आधारित होते हैं।
निष्कर्ष
श्री शनि चालीसा भगवान शनिदेव की न्यायप्रियता, करुणा और कर्मफल के सिद्धांत का दिव्य स्तवन है। श्रद्धा और विश्वास के साथ इसका नियमित पाठ करने से व्यक्ति अपने जीवन में अनुशासन, धैर्य, आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच विकसित करने की प्रेरणा प्राप्त करता है। यह चालीसा केवल भगवान की स्तुति नहीं, बल्कि स्वयं के जीवन को बेहतर बनाने का आध्यात्मिक मार्ग भी है।
भगवान शनिदेव हमें यह शिक्षा देते हैं कि सच्ची सफलता अच्छे कर्म, ईमानदारी, परिश्रम और न्यायपूर्ण जीवन जीने में है। जब व्यक्ति अपने कर्मों को सुधारने का प्रयास करता है और दूसरों के साथ सम्मानपूर्वक व्यवहार करता है, तब भगवान शनिदेव की कृपा उसके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का माध्यम बनती है।
यदि आप श्रद्धा, विनम्रता और पूर्ण विश्वास के साथ नियमित रूप से श्री शनि चालीसा का पाठ करते हैं, तो यह आपकी दैनिक आध्यात्मिक साधना का महत्वपूर्ण भाग बन सकता है तथा आपको सत्य, धैर्य और सदाचार के मार्ग पर निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता रहेगा।
॥ जय श्री शनिदेव महाराज ॥
॥ ॐ शं शनैश्चराय नमः ॥
श्री कार्तिकेय चालीसा (Kartikeya Chalisa)
श्री सूर्य चालीसा (Surya Chalisa)
श्री गंगा चालीसा (Ganga Chalisa)
श्री राम चालीसा (Ram Chalisa)
दुर्गा चालीसा (Durga Chalisa)
श्री नरसिंह चालीसा (Narasimha Chalisa)