
श्री गायत्री चालीसा
श्री गायत्री चालीसा वेदमाता माँ गायत्री को समर्पित एक अत्यंत पवित्र और दिव्य स्तुति है। माँ गायत्री को ज्ञान, बुद्धि, विवेक, आध्यात्मिक जागृति और आत्मिक प्रकाश की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है। वे समस्त वेदों की जननी तथा सनातन धर्म में सर्वोच्च पूजनीय शक्तियों में से एक हैं। श्रद्धा और विश्वास के साथ श्री गायत्री चालीसा का नियमित पाठ करने से मन की शुद्धि, सकारात्मक विचार, आत्मबल और आध्यात्मिक चेतना का विकास होता है।
माँ गायत्री का स्वरूप अत्यंत तेजस्वी और करुणामयी माना जाता है। वे पाँच मुखों और दस भुजाओं से सुशोभित होकर कमलासन पर विराजमान रहती हैं। उनके प्रत्येक स्वरूप में ज्ञान, धर्म, सत्य, शांति और दिव्य ऊर्जा का संदेश समाहित है। वे अपने भक्तों को अज्ञान के अंधकार से निकालकर ज्ञान और विवेक के प्रकाश की ओर ले जाने वाली देवी मानी जाती हैं।
श्री गायत्री चालीसा क्या है?
श्री गायत्री चालीसा चालीस चौपाइयों और दोहों से युक्त एक पवित्र स्तोत्र है, जिसमें माँ गायत्री की महिमा, उनकी दिव्य शक्ति, करुणा और भक्तों के प्रति उनके आशीर्वाद का वर्णन किया गया है। यह चालीसा व्यक्ति को ज्ञान, आत्मचिंतन, सदाचार और आध्यात्मिक उन्नति के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।
श्री गायत्री चालीसा का नियमित पाठ केवल देवी की स्तुति नहीं है, बल्कि मन, बुद्धि और आत्मा को पवित्र बनाने का एक आध्यात्मिक साधन भी है। यह भक्त के भीतर सकारात्मक सोच, संयम, धैर्य और विवेक का विकास करने में सहायक माना जाता है।
श्री गायत्री चालीसा का महत्व
सनातन धर्म में माँ गायत्री को वेदमाता तथा समस्त ज्ञान की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है। गायत्री मंत्र को वेदों का सार कहा गया है और उसी प्रकार श्री गायत्री चालीसा भी भक्तों के लिए ज्ञान, भक्ति और आत्मिक जागृति का महत्वपूर्ण माध्यम मानी जाती है।
गायत्री जयंती, वसंत पंचमी, नवरात्रि, पूर्णिमा, गुरुवार तथा प्रतिदिन प्रातःकाल के समय श्री गायत्री चालीसा का पाठ विशेष रूप से शुभ माना जाता है। अनेक श्रद्धालु गायत्री मंत्र के जप के साथ इस चालीसा का भी नियमित पाठ करते हैं।
यह चालीसा हमें यह प्रेरणा देती है कि जीवन में सच्चा ज्ञान, सद्बुद्धि और अच्छे संस्कार ही वास्तविक समृद्धि हैं। जब मन ज्ञान के प्रकाश से प्रकाशित होता है, तब व्यक्ति सही निर्णय लेने और धर्म के मार्ग पर चलने में सक्षम बनता है।
श्री गायत्री चालीसा के लाभ
- माँ गायत्री के प्रति श्रद्धा और भक्ति में वृद्धि होती है।
- मन, बुद्धि और विचारों में सकारात्मकता का विकास होता है।
- ज्ञान, विवेक और निर्णय लेने की क्षमता मजबूत होती है।
- आध्यात्मिक साधना और ईश्वर के प्रति विश्वास बढ़ता है।
- मन की एकाग्रता और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है।
- नकारात्मक विचारों को दूर कर सकारात्मक सोच विकसित होती है।
- सत्य, सदाचार और अनुशासन के मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है।
- विद्यार्थियों और ज्ञान प्राप्त करने वाले साधकों के लिए प्रेरणादायक मानी जाती है।
- परिवार में शांति, सौहार्द और आध्यात्मिक वातावरण बना रहता है।
- जीवन में आत्मिक शांति और ईश्वर के प्रति समर्पण की भावना विकसित होती है।
श्री गायत्री चालीसा कब पढ़नी चाहिए?
श्री गायत्री चालीसा का पाठ प्रतिदिन प्रातःकाल ब्रह्ममुहूर्त अथवा सूर्योदय के समय करना अत्यंत शुभ माना जाता है। स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें, माँ गायत्री का ध्यान करें और श्रद्धापूर्वक चालीसा का पाठ करें।
गायत्री जयंती, वसंत पंचमी, नवरात्रि, पूर्णिमा तथा गुरुवार के दिन इसका विशेष महत्व माना जाता है। अनेक श्रद्धालु गायत्री मंत्र के जप के पश्चात श्री गायत्री चालीसा का पाठ भी करते हैं।
श्री गायत्री चालीसा पढ़ने की विधि
- प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ एवं सात्विक वस्त्र धारण करें।
- पूजा स्थान को स्वच्छ करके माँ गायत्री की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
- घी का दीपक और धूप जलाएँ।
- सफेद, पीले या लाल पुष्प अर्पित करें।
- यदि संभव हो तो पहले गायत्री मंत्र का जप करें।
- पूर्ण श्रद्धा और एकाग्रता के साथ श्री गायत्री चालीसा का पाठ करें।
- ज्ञान, सद्बुद्धि और समस्त प्राणियों के कल्याण की प्रार्थना करें।
- पाठ के अंत में माँ गायत्री की आरती करें और प्रसाद अर्पित करें।
श्री गायत्री चालीसा का पाठ करने से पहले ध्यान रखने योग्य बातें
- मन, वचन और कर्म की पवित्रता बनाए रखें।
- पाठ करते समय मन को शांत और एकाग्र रखें।
- जहाँ तक संभव हो सात्विक भोजन और शुद्ध आचरण अपनाएँ।
- नियमित रूप से गायत्री मंत्र का जप करने का प्रयास करें।
- सत्य, सदाचार और विनम्रता को अपने जीवन का आधार बनाएँ।
- किसी के प्रति ईर्ष्या, द्वेष या नकारात्मक भावना न रखें।
- श्रद्धा, विश्वास और नियमितता के साथ श्री गायत्री चालीसा का पाठ करें।
अब आइए, पूर्ण श्रद्धा, भक्ति और एकाग्र मन से सम्पूर्ण श्री गायत्री चालीसा का पाठ करें तथा वेदमाता माँ गायत्री की दिव्य कृपा, ज्ञान और सद्बुद्धि का आशीर्वाद प्राप्त करें।
सम्पूर्ण श्री गायत्री चालीसा
अब श्रद्धा, विश्वास और पूर्ण एकाग्रता के साथ वेदमाता माँ गायत्री का ध्यान करें तथा श्री गायत्री चालीसा का पाठ करें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माँ गायत्री ज्ञान, विवेक, आत्मबल और आध्यात्मिक चेतना की अधिष्ठात्री देवी हैं। उनके चरणों में समर्पित भाव से किया गया यह पाठ मन को पवित्र करता है और जीवन में सत्य, सदाचार तथा ज्ञान के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
॥ दोहा ॥
ह्रीं श्रीं क्लीं मेधा प्रभा, जीवन ज्योति प्रचण्ड।
शांति, क्रांति, जागृति, प्रगति, रचना शक्ति अखण्ड॥
जगत जननि मंगल करनि, गायत्री सुखधाम।
प्रणव ॐ सावित्री स्वरूपा, स्वाहा पूरन काम॥
॥ चौपाई ॥
भूर्भुवः स्वः ॐ युत जननी।
गायत्री नित कलिमल दहनी॥
अक्षर चौबीस परम पुनीता।
इनमें बसें शास्त्र श्रुति गीता॥
शाश्वत सतोगुण सतरूपा।
सत्य सनातन सुधा अनूपा॥
हंसारूढ़ सितम्बर धारी।
स्वर्ण कान्ति शुचि गगन बिहारी॥
पुस्तक पुष्प कमंडलु माला।
शुभ्र वर्ण तनु नयन विशाला॥
ध्यान धरत पुलकित हिय होई।
सुख उपजत दुःख दारिद्र खोई॥
कामधेनु तुम सुरतरु छाया।
निराकार की अद्भुत माया॥
तुम्हरी शरण गहे जो कोई।
तरे सकल संकट सोई॥
सरस्वती लक्ष्मी तुम काली।
दीपै ज्ञान ज्योति निराली॥
तुम्हरी महिमा पार न पावै।
जो जन गावे सुख फल पावै॥
सुमिरत होत पाप सब नाशा।
पूरन होवे मन अभिलाषा॥
बुद्धि विवेक शक्ति की दाता।
भक्त जनों की तुम हो त्राता॥
सद्बुद्धि मन में तुम भर देती।
अज्ञान तम सब हर लेती॥
दीन दुखी पर करहु दयाला।
राखहु लाज जनन प्रतिपाला॥
श्रद्धा भक्ति हृदय बस जावे।
जीवन मंगलमय बन जावे॥
जो नित गायत्री गुण गावै।
सुख समृद्धि सहज ही पावै॥
वेद पुराण महिमा गावे।
सुर नर मुनि सब शीश नवावे॥
भव भय हरहु मात भवानी।
ज्ञान स्वरूपा मंगलदानी॥
भक्ति शक्ति मन में भर दीजै।
जीवन सफल सदा कर दीजै॥
जय जय जय गायत्री माता।
भक्त जनों की भाग्य विधाता॥
॥ समापन दोहा ॥
जो यह गायत्री चालीसा, श्रद्धा सहित पढ़ाय।
ज्ञान, बुद्धि, सुख, शांति सब, माता कृपा दिलाय॥
जय जय गायत्री माता।
वेदमाता जगत विख्याता॥
श्री गायत्री चालीसा का नियमित पाठ क्यों करें?
श्री गायत्री चालीसा का नियमित पाठ माँ गायत्री की दिव्य कृपा, ज्ञान और सद्बुद्धि का स्मरण कराता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्रद्धा और विश्वास के साथ किया गया यह पाठ मन को शांत, बुद्धि को निर्मल और विचारों को सकारात्मक बनाने की प्रेरणा देता है। माँ गायत्री की उपासना व्यक्ति को आत्मचिंतन, आध्यात्मिक विकास और सत्य के मार्ग पर आगे बढ़ने की शक्ति प्रदान करती है।
अब जब आपने श्रद्धापूर्वक सम्पूर्ण श्री गायत्री चालीसा का पाठ कर लिया है, आइए अगले भाग में इसकी प्रत्येक चौपाई का सरल भावार्थ और आध्यात्मिक महत्व विस्तार से समझते हैं।
श्री गायत्री चालीसा का भावार्थ
श्री गायत्री चालीसा वेदमाता माँ गायत्री की महिमा, ज्ञान, दिव्य शक्ति और करुणा का वर्णन करने वाला एक अत्यंत पवित्र स्तोत्र है। इसकी प्रत्येक चौपाई भक्त को यह प्रेरणा देती है कि जीवन में सच्चा ज्ञान, सद्बुद्धि, सत्य और आत्मचिंतन ही वास्तविक उन्नति का आधार हैं। माँ गायत्री अज्ञान रूपी अंधकार को दूर करके आत्मा को ज्ञान के प्रकाश से प्रकाशित करने वाली आदिशक्ति मानी जाती हैं।
श्री गायत्री चालीसा का नियमित पाठ केवल देवी की स्तुति नहीं है, बल्कि अपने विचारों, व्यवहार और जीवन को सकारात्मक दिशा देने का आध्यात्मिक माध्यम भी है। यह चालीसा व्यक्ति को विवेकपूर्ण निर्णय लेने, धर्म के मार्ग पर चलने और ईश्वर के प्रति समर्पण का भाव विकसित करने की प्रेरणा देती है।
माँ गायत्री का दिव्य स्वरूप
माँ गायत्री को वेदमाता, ब्रह्मशक्ति और ज्ञान की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है। उनका तेजस्वी स्वरूप ज्ञान, पवित्रता और दिव्य चेतना का प्रतीक है। वे कमलासन पर विराजमान रहती हैं तथा उनके हाथों में वेद, कमंडल, जपमाला और कमल जैसे दिव्य प्रतीक दिखाई देते हैं, जो ज्ञान, साधना, पवित्रता और आध्यात्मिक उन्नति का संदेश देते हैं।
माँ गायत्री का प्रत्येक स्वरूप भक्त को यह सिखाता है कि जीवन में सच्ची सफलता केवल बाहरी उपलब्धियों से नहीं, बल्कि शुद्ध विचारों, अच्छे संस्कारों और ईश्वर के प्रति श्रद्धा से प्राप्त होती है।
गायत्री उपासना का महत्व
सनातन धर्म में गायत्री मंत्र को वेदों का सार कहा गया है। उसी प्रकार श्री गायत्री चालीसा भी ज्ञान, भक्ति और आध्यात्मिक जागृति का महत्वपूर्ण स्तोत्र मानी जाती है। श्रद्धापूर्वक माँ गायत्री की उपासना करने से व्यक्ति के भीतर आत्मविश्वास, विवेक और आध्यात्मिक चेतना का विकास होने की प्रेरणा मिलती है।
गायत्री उपासना केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह मन, बुद्धि और आत्मा को शुद्ध करने का एक श्रेष्ठ माध्यम भी मानी जाती है।
श्री गायत्री चालीसा का आध्यात्मिक संदेश
श्री गायत्री चालीसा का मुख्य संदेश यह है कि मनुष्य को सदैव ज्ञान, सत्य, विवेक और सदाचार का अनुसरण करना चाहिए। माँ गायत्री हमें सिखाती हैं कि अज्ञान, अहंकार और नकारात्मक विचारों से ऊपर उठकर ज्ञान, विनम्रता और सेवा के मार्ग पर चलना ही जीवन का वास्तविक उद्देश्य है।
जब व्यक्ति अपने विचारों को शुद्ध करता है और अच्छे कर्मों को अपनाता है, तब उसका जीवन स्वयं प्रकाशमय बनने लगता है। यही इस चालीसा का वास्तविक आध्यात्मिक संदेश है।
ज्ञान और विवेक का महत्व
माँ गायत्री ज्ञान और बुद्धि की देवी हैं। उनकी आराधना व्यक्ति को सही और गलत में अंतर समझने की क्षमता विकसित करने की प्रेरणा देती है। जीवन में अनेक परिस्थितियाँ ऐसी आती हैं जहाँ केवल ज्ञान ही सही निर्णय लेने में सहायता करता है।
श्री गायत्री चालीसा हमें यह सिखाती है कि शिक्षा केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं है, बल्कि अच्छे संस्कार, विनम्रता, आत्मसंयम और सत्कर्म भी वास्तविक ज्ञान का हिस्सा हैं।
सकारात्मक जीवन की प्रेरणा
माँ गायत्री का दिव्य प्रकाश यह संदेश देता है कि प्रत्येक व्यक्ति अपने विचारों को सकारात्मक बनाकर अपने जीवन में परिवर्तन ला सकता है। ईर्ष्या, क्रोध, लोभ और अहंकार जैसे दोषों को त्यागकर प्रेम, दया, क्षमा और सहयोग की भावना अपनाना ही सच्ची साधना है।
श्री गायत्री चालीसा का नियमित पाठ व्यक्ति को मानसिक संतुलन, आत्मविश्वास और आध्यात्मिक शांति प्राप्त करने की प्रेरणा देता है।
नियमित पाठ का महत्व
प्रतिदिन प्रातःकाल, ब्रह्ममुहूर्त, गुरुवार, पूर्णिमा, गायत्री जयंती तथा नवरात्रि के अवसर पर श्री गायत्री चालीसा का पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है। नियमित पाठ से मन में एकाग्रता बढ़ती है, सकारात्मक विचार विकसित होते हैं और आध्यात्मिक साधना अधिक प्रभावशाली बनती है।
श्रद्धा, भक्ति और नियमितता के साथ किया गया पाठ व्यक्ति के भीतर आत्मबल, विवेक और ईश्वर के प्रति अटूट विश्वास को मजबूत करने में सहायक माना जाता है।
माँ गायत्री की कृपा प्राप्त करने के सरल उपाय
- प्रतिदिन श्रद्धापूर्वक श्री गायत्री चालीसा का पाठ करें।
- जहाँ तक संभव हो गायत्री मंत्र का नियमित जप करें।
- प्रातःकाल ध्यान और प्रार्थना को अपनी दिनचर्या का भाग बनाएँ।
- ज्ञान प्राप्त करने और अच्छे संस्कार अपनाने का प्रयास करें।
- सत्य, विनम्रता और सदाचार को जीवन का आधार बनाएँ।
- माता-पिता, गुरु और बड़ों का सम्मान करें।
- सेवा, दया और परोपकार के कार्यों में भाग लें।
श्री गायत्री चालीसा से मिलने वाली प्रेरणा
श्री गायत्री चालीसा हमें यह सिखाती है कि वास्तविक प्रकाश बाहर नहीं, बल्कि हमारे भीतर मौजूद ज्ञान, विवेक और आत्मचेतना में है। माँ गायत्री की उपासना व्यक्ति को अपने विचारों को शुद्ध करने, जीवन को अनुशासित बनाने और ईश्वर के प्रति समर्पण का भाव विकसित करने की प्रेरणा देती है।
जो भक्त श्रद्धा और विश्वास के साथ नियमित रूप से श्री गायत्री चालीसा का पाठ करते हैं, वे अपने जीवन में मानसिक शांति, सकारात्मक सोच, आत्मबल और आध्यात्मिक उन्नति का अनुभव करते हैं। माँ गायत्री की कृपा हमें सदैव ज्ञान, सत्य, सदाचार और मानवता के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।
अब आइए, श्री गायत्री चालीसा से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण प्रश्नों के उत्तर जानते हैं, जो श्रद्धालुओं द्वारा अक्सर पूछे जाते हैं।
श्री गायत्री चालीसा से जुड़े सामान्य प्रश्न (FAQs)
1. श्री गायत्री चालीसा का पाठ किस दिन करना सबसे शुभ माना जाता है?
यद्यपि श्री गायत्री चालीसा का पाठ प्रतिदिन किया जा सकता है, लेकिन गुरुवार, पूर्णिमा, गायत्री जयंती, वसंत पंचमी तथा नवरात्रि के दौरान इसका विशेष महत्व माना जाता है।
2. क्या श्री गायत्री चालीसा का पाठ प्रतिदिन किया जा सकता है?
हाँ, श्रद्धा और विश्वास के साथ प्रतिदिन श्री गायत्री चालीसा का पाठ किया जा सकता है। नियमित पाठ मन की एकाग्रता, सकारात्मक सोच और आध्यात्मिक चेतना विकसित करने में प्रेरणादायक माना जाता है।
3. श्री गायत्री चालीसा पढ़ने का सबसे अच्छा समय कौन-सा है?
ब्रह्ममुहूर्त या सूर्योदय के समय स्नान के बाद शांत मन से माँ गायत्री का ध्यान करते हुए चालीसा का पाठ करना सर्वोत्तम माना जाता है।
4. क्या घर में श्री गायत्री चालीसा का पाठ किया जा सकता है?
हाँ, घर के पूजा स्थान पर स्वच्छ वातावरण में श्रद्धा और भक्ति के साथ श्री गायत्री चालीसा का पाठ किया जा सकता है।
5. क्या विद्यार्थी श्री गायत्री चालीसा का पाठ कर सकते हैं?
हाँ, विद्यार्थी श्रद्धा और नियमितता के साथ श्री गायत्री चालीसा का पाठ कर सकते हैं। यह उन्हें ज्ञान, एकाग्रता, आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच की प्रेरणा देती है।
6. क्या श्री गायत्री चालीसा पढ़ने से पहले गायत्री मंत्र का जप करना आवश्यक है?
यदि संभव हो तो पहले गायत्री मंत्र का जप करना शुभ माना जाता है, लेकिन केवल श्रद्धापूर्वक श्री गायत्री चालीसा का पाठ करना भी पूर्ण रूप से उचित माना जाता है।
7. क्या महिलाएँ और पुरुष दोनों श्री गायत्री चालीसा का पाठ कर सकते हैं?
हाँ, माँ गायत्री की उपासना सभी श्रद्धालुओं के लिए समान रूप से शुभ मानी जाती है। स्त्री, पुरुष, युवा और बुजुर्ग सभी इसका पाठ कर सकते हैं।
8. क्या श्री गायत्री चालीसा का पाठ परिवार के साथ किया जा सकता है?
हाँ, परिवार के साथ सामूहिक रूप से श्री गायत्री चालीसा का पाठ करने से घर में सकारात्मक, सात्विक और आध्यात्मिक वातावरण का अनुभव होता है।
9. क्या श्री गायत्री चालीसा केवल विशेष पर्वों पर ही पढ़नी चाहिए?
नहीं, इसे केवल पर्वों पर ही नहीं बल्कि दैनिक पूजा और आध्यात्मिक साधना के रूप में भी पढ़ा जा सकता है।
10. क्या माँ गायत्री ज्ञान और बुद्धि की देवी मानी जाती हैं?
हाँ, सनातन धर्म में माँ गायत्री को वेदमाता, ज्ञान, विवेक, सद्बुद्धि और आध्यात्मिक जागृति की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है।
11. क्या श्री गायत्री चालीसा का नियमित पाठ आध्यात्मिक साधना का भाग बन सकता है?
हाँ, नियमित रूप से श्री गायत्री चालीसा का पाठ करने से ईश्वर के प्रति श्रद्धा बढ़ती है तथा मन, बुद्धि और विचारों में सकारात्मक परिवर्तन आने की प्रेरणा मिलती है।
12. क्या श्री गायत्री चालीसा पढ़ने के लिए किसी विशेष नियम का पालन करना आवश्यक है?
मुख्य रूप से मन की पवित्रता, श्रद्धा, नियमितता और एकाग्रता का पालन करना आवश्यक माना जाता है। सात्विक जीवनशैली अपनाना भी शुभ माना जाता है।
13. क्या गायत्री मंत्र और श्री गायत्री चालीसा साथ में पढ़ी जा सकती हैं?
हाँ, अनेक श्रद्धालु पहले गायत्री मंत्र का जप करते हैं और उसके बाद श्रद्धापूर्वक श्री गायत्री चालीसा का पाठ करते हैं।
14. क्या श्री गायत्री चालीसा का पाठ किसी भी आयु का व्यक्ति कर सकता है?
हाँ, बच्चे, विद्यार्थी, गृहस्थ, साधक और बुजुर्ग सभी श्रद्धा और विश्वास के साथ इसका पाठ कर सकते हैं।
15. श्री गायत्री चालीसा का मुख्य संदेश क्या है?
श्री गायत्री चालीसा का मुख्य संदेश ज्ञान, सद्बुद्धि, सत्य, सदाचार, आत्मचिंतन और ईश्वर के प्रति अटूट श्रद्धा विकसित करना है। यह व्यक्ति को प्रकाश, विवेक और आध्यात्मिक उन्नति के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।
निष्कर्ष
श्री गायत्री चालीसा वेदमाता माँ गायत्री की दिव्य महिमा, ज्ञान, करुणा और आध्यात्मिक शक्ति का पवित्र स्तवन है। श्रद्धा और विश्वास के साथ इसका नियमित पाठ करने से मन में सकारात्मकता, आत्मबल, विवेक और आध्यात्मिक जागरूकता विकसित होती है। यह चालीसा केवल देवी की स्तुति नहीं, बल्कि जीवन को ज्ञान, सत्य और सदाचार के मार्ग पर आगे बढ़ाने का दिव्य मार्गदर्शन भी प्रदान करती है।
माँ गायत्री का संदेश हमें सिखाता है कि सच्ची समृद्धि धन से नहीं बल्कि ज्ञान, अच्छे संस्कार, विनम्रता और मानवता से प्राप्त होती है। जब व्यक्ति अपने विचारों को पवित्र बनाकर ईश्वर के प्रति समर्पण का भाव रखता है, तब उसका जीवन अधिक शांत, संतुलित और उद्देश्यपूर्ण बनता है।
यदि आप श्रद्धा, नियमितता और पूर्ण विश्वास के साथ श्री गायत्री चालीसा का पाठ करते हैं, तो यह आपकी दैनिक आध्यात्मिक साधना का महत्वपूर्ण भाग बन सकता है तथा आपको ज्ञान, विवेक, आत्मविश्वास और सकारात्मक जीवन की दिशा में निरंतर प्रेरित करता रहेगा।
॥ जय माँ गायत्री ॥
॥ ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् ॥
श्री दत्तात्रेय चालीसा (Dattatreya Chalisa)
श्री यमुना चालीसा (Yamuna Chalisa)
श्री शनि चालीसा (Shani Chalisa)
श्री वैष्णो देवी चालीसा (Vaishno Devi Chalisa)
श्री गणेश चालीसा (Ganesh Chalisa)
श्री नरसिंह चालीसा (Narasimha Chalisa)