
श्री तुलसी चालीसा
श्री तुलसी चालीसा माँ तुलसी को समर्पित एक अत्यंत पवित्र और भक्तिपूर्ण स्तुति है। सनातन धर्म में तुलसी माता को देवी वृंदा का स्वरूप तथा भगवान श्री विष्णु की परम प्रिय माना जाता है। प्रत्येक वैष्णव भक्त के लिए तुलसी केवल एक पवित्र पौधा नहीं, बल्कि श्रद्धा, भक्ति, पवित्रता और आध्यात्मिक ऊर्जा का दिव्य प्रतीक हैं। श्रद्धा और विश्वास के साथ श्री तुलसी चालीसा का नियमित पाठ करने से मन में भक्ति, सकारात्मक सोच, आत्मिक शांति और भगवान के प्रति अटूट समर्पण का विकास होता है।
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार जिस घर में तुलसी का पौधा स्थापित होता है और उसकी नियमित पूजा की जाती है, वहाँ सात्विकता, पवित्रता और आध्यात्मिक वातावरण बना रहता है। तुलसी माता की कृपा से व्यक्ति के भीतर सेवा, विनम्रता, सदाचार और भगवान के प्रति प्रेम की भावना मजबूत होती है।
श्री तुलसी चालीसा क्या है?
श्री तुलसी चालीसा चालीस चौपाइयों और दोहों से युक्त एक पवित्र स्तोत्र है, जिसमें तुलसी माता की महिमा, भगवान विष्णु के प्रति उनकी अनन्य भक्ति तथा भक्तों पर उनकी कृपा का सुंदर वर्णन किया गया है। यह चालीसा भक्तों के मन में श्रद्धा, सेवा, भक्ति और धार्मिक आचरण के प्रति प्रेरणा उत्पन्न करती है।
श्री तुलसी चालीसा का नियमित पाठ केवल तुलसी माता की स्तुति नहीं है, बल्कि अपने जीवन में पवित्रता, संयम, प्रेम, सेवा और आध्यात्मिक अनुशासन अपनाने का एक श्रेष्ठ माध्यम भी है। यह व्यक्ति को सात्विक जीवनशैली अपनाने और ईश्वर के निकट जाने की प्रेरणा देता है।
श्री तुलसी चालीसा का महत्व
सनातन धर्म में तुलसी माता का विशेष स्थान है। भगवान विष्णु, श्रीकृष्ण और शालिग्राम की पूजा तुलसी दल के बिना अधूरी मानी जाती है। इसलिए तुलसी माता की आराधना केवल धार्मिक परंपरा ही नहीं, बल्कि भक्ति और आध्यात्मिक जीवन का महत्वपूर्ण अंग भी है।
विशेष रूप से तुलसी विवाह, देवउठनी एकादशी, कार्तिक मास, एकादशी, गुरुवार तथा भगवान विष्णु की पूजा के अवसर पर श्री तुलसी चालीसा का पाठ अत्यंत शुभ माना जाता है। अनेक श्रद्धालु प्रतिदिन प्रातःकाल तुलसी माता की पूजा के साथ इसका पाठ करते हैं।
यह चालीसा हमें यह प्रेरणा देती है कि जीवन में पवित्र विचार, सदाचार, सेवा, भक्ति और ईश्वर के प्रति अटूट विश्वास बनाए रखना ही वास्तविक आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग है।
श्री तुलसी चालीसा के लाभ
- तुलसी माता के प्रति श्रद्धा और भक्ति मजबूत होती है।
- भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण के प्रति प्रेम एवं समर्पण बढ़ता है।
- मन में शांति, सात्विकता और सकारात्मक सोच विकसित होती है।
- आध्यात्मिक साधना और नियमित पूजा की प्रेरणा मिलती है।
- सदाचार, सेवा और विनम्रता जैसे गुणों का विकास होता है।
- मानसिक एकाग्रता और आत्मिक संतुलन मजबूत होता है।
- परिवार में प्रेम, सुख और धार्मिक वातावरण बनाए रखने की प्रेरणा मिलती है।
- नियमित भक्ति और अनुशासित जीवन जीने की आदत विकसित होती है।
- ईश्वर के प्रति अटूट श्रद्धा और विश्वास मजबूत होता है।
- तुलसी माता की कृपा से आध्यात्मिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव होता है।
श्री तुलसी चालीसा कब पढ़नी चाहिए?
श्री तुलसी चालीसा का पाठ प्रतिदिन किया जा सकता है, लेकिन कार्तिक मास, देवउठनी एकादशी, तुलसी विवाह, एकादशी, गुरुवार तथा प्रातःकाल का समय विशेष रूप से शुभ माना जाता है। तुलसी माता की पूजा के बाद श्रद्धापूर्वक इस चालीसा का पाठ करना अत्यंत मंगलकारी माना जाता है।
जो श्रद्धालु भगवान विष्णु और भगवान श्रीकृष्ण की उपासना करते हैं, वे अपनी दैनिक पूजा में भी श्री तुलसी चालीसा का नियमित पाठ कर सकते हैं।
श्री तुलसी चालीसा पढ़ने की विधि
- प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ एवं सात्विक वस्त्र धारण करें।
- तुलसी माता के पौधे अथवा उनके चित्र के समक्ष पूजा करें।
- घी का दीपक जलाकर जल अर्पित करें।
- भगवान विष्णु और तुलसी माता का ध्यान करें।
- तुलसी के समक्ष श्रद्धापूर्वक पुष्प और नैवेद्य अर्पित करें।
- पूर्ण श्रद्धा और एकाग्रता के साथ श्री तुलसी चालीसा का पाठ करें।
- परिवार, समाज और समस्त प्राणियों के कल्याण की प्रार्थना करें।
- पाठ के अंत में भगवान विष्णु एवं तुलसी माता की आरती करें।
श्री तुलसी चालीसा का पाठ करने से पहले ध्यान रखने योग्य बातें
- मन, वचन और कर्म की पवित्रता बनाए रखें।
- पूजा के समय मन को शांत और एकाग्र रखें।
- जहाँ तक संभव हो सात्विक भोजन और शुद्ध जीवनशैली अपनाएँ।
- तुलसी माता के प्रति श्रद्धा और सम्मान बनाए रखें।
- क्रोध, अहंकार और ईर्ष्या जैसी नकारात्मक भावनाओं से दूर रहें।
- भगवान विष्णु और तुलसी माता के प्रति पूर्ण श्रद्धा एवं विश्वास रखें।
- नियमित रूप से श्री तुलसी चालीसा का पाठ करें तथा सदैव अच्छे कर्म करने का प्रयास करें।
अब आइए, पूर्ण श्रद्धा, भक्ति और समर्पण के साथ सम्पूर्ण श्री तुलसी चालीसा का पाठ करें तथा तुलसी माता की दिव्य कृपा, पवित्रता और भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त करें।
सम्पूर्ण श्री तुलसी चालीसा
अब श्रद्धा, विश्वास और पूर्ण समर्पण के साथ श्री तुलसी माता का ध्यान करें तथा श्री तुलसी चालीसा का पाठ करें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार तुलसी माता भगवान श्री विष्णु की परम प्रिय तथा पवित्रता, भक्ति और सात्विक जीवन का दिव्य प्रतीक हैं। श्रद्धापूर्वक किया गया यह पाठ मन में शुद्धता, भक्ति, सेवा और भगवान के प्रति अटूट विश्वास की भावना विकसित करता है।
॥ दोहा ॥
जय तुलसी महारानी, विष्णु प्रिया सुखधाम।
भक्त जनों पर कीजिए, सदा कृपा निष्काम॥
वृंदा रूप पवित्र तुम, हरि चरणन की दास।
भक्ति भाव से जो जपे, पूर्ण हों सब आस॥
॥ चौपाई ॥
जय जय तुलसी महारानी।
हरि प्रिय अति मंगलदानी॥
वृंदा रूप सुहावन माता।
भक्तन की तुम भाग्य विधाता॥
हरि चरणन की प्रिय तुम नारी।
जग में महिमा अति अपारी॥
दीन दुखी पर दया दिखावो।
जीवन में सुख शांति लावो॥
जो जन श्रद्धा सहित ध्यावे।
मनवांछित फल सहजहि पावे॥
प्रेम भक्ति मन में भर दीजै।
सद्बुद्धि का वरदान दीजै॥
हरि नाम का दीप जलावो।
भक्ति मार्ग हमको बतावो॥
सत्य धर्म का पाठ पढ़ावो।
जीवन सफल सदा बनावो॥
क्रोध अहं सब दूर भगावो।
प्रेम प्रकाश मन में लावो॥
सेवा भाव हृदय में भर दो।
करुणा का वरदान कर दो॥
घर परिवार सुखमय हो जावे।
मंगल दीप सदा जगमगावे॥
हरि भक्ति में मन लग जावे।
जीवन सफल सहज बन जावे॥
भक्त पुकार सुनो महारानी।
करुणामयी जग कल्याणी॥
भवसागर से पार लगावो।
अपने चरणन में बसावो॥
विष्णु प्रिय तुम जग में माता।
सबकी हो सुखदायिनी दाता॥
पावन नाम तुम्हारा न्यारा।
हर ले संकट भार हमारा॥
भक्ति सुधा बरसाओ माता।
हरि कृपा की तुम हो दाता॥
जय जय तुलसी कृपा निधान।
पूरण कर दो शुभ अरमान॥
हरि चरणों तक राह दिखावो।
जीवन मंगलमय बनावो॥
कृपा दृष्टि हम पर बरसाओ।
भक्ति रस में हमें बसाओ॥
॥ समापन दोहा ॥
जो यह तुलसी चालीसा, श्रद्धा सहित पढ़ाय।
हरि कृपा से भक्त जन, सुख-समृद्धि सब पाय॥
जय श्री तुलसी माता।
जय श्री हरि नारायण॥
श्री तुलसी चालीसा का नियमित पाठ क्यों करें?
श्री तुलसी चालीसा का नियमित पाठ तुलसी माता की पवित्रता, निष्काम भक्ति और भगवान श्री विष्णु के प्रति उनके दिव्य समर्पण का स्मरण कराता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्रद्धा और विश्वास के साथ किया गया यह पाठ मन में सात्विकता, सेवा, संयम और ईश्वर के प्रति अटूट श्रद्धा विकसित करने की प्रेरणा देता है। तुलसी माता की कृपा से भक्त के भीतर भक्ति, सदाचार और आध्यात्मिक जागरूकता का विकास होता है।
अब जब आपने श्रद्धापूर्वक सम्पूर्ण श्री तुलसी चालीसा का पाठ कर लिया है, आइए अगले भाग में इसकी प्रत्येक चौपाई का सरल भावार्थ और आध्यात्मिक महत्व विस्तार से समझते हैं।
श्री तुलसी चालीसा का भावार्थ
श्री तुलसी चालीसा तुलसी माता की पवित्रता, भगवान श्री विष्णु के प्रति उनकी अनन्य भक्ति और भक्तों पर उनकी असीम कृपा का वर्णन करने वाला एक अत्यंत पवित्र स्तोत्र है। इसकी प्रत्येक चौपाई हमें यह प्रेरणा देती है कि जीवन में पवित्रता, सेवा, विनम्रता, संयम और ईश्वर के प्रति अटूट श्रद्धा ही सच्ची आध्यात्मिक उन्नति का आधार हैं। तुलसी माता केवल एक पवित्र पौधा नहीं, बल्कि सनातन धर्म में देवी वृंदा का दिव्य स्वरूप मानी जाती हैं।
श्री तुलसी चालीसा का नियमित पाठ केवल तुलसी माता की स्तुति नहीं है, बल्कि अपने जीवन में सात्विकता, अनुशासन, धार्मिक आचरण और भगवान के प्रति पूर्ण समर्पण विकसित करने का एक श्रेष्ठ आध्यात्मिक साधन भी है। यह भक्त को मन, वचन और कर्म की पवित्रता बनाए रखने की प्रेरणा देता है।
तुलसी माता का दिव्य स्वरूप
सनातन धर्म में तुलसी माता को भगवान श्री विष्णु की परम प्रिय माना जाता है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार वे देवी वृंदा का स्वरूप हैं और प्रत्येक वैष्णव भक्त के लिए विशेष पूजनीय हैं। भगवान विष्णु, श्रीकृष्ण और शालिग्राम की पूजा तुलसी दल के बिना पूर्ण नहीं मानी जाती।
तुलसी माता का दिव्य स्वरूप हमें यह सिखाता है कि सच्ची भक्ति का आधार बाहरी वैभव नहीं, बल्कि पवित्र मन, सच्ची श्रद्धा और निष्काम सेवा है।
तुलसी माता की भक्ति का संदेश
तुलसी माता का जीवन भगवान के प्रति पूर्ण समर्पण, तपस्या और पवित्रता का प्रतीक माना जाता है। वे हमें यह शिक्षा देती हैं कि ईश्वर की भक्ति केवल पूजा तक सीमित नहीं, बल्कि सत्य, संयम, करुणा और सेवा से परिपूर्ण जीवन जीने में भी प्रकट होती है।
श्री तुलसी चालीसा हमें प्रेरित करती है कि हम अपने दैनिक जीवन में सात्विक विचार, मधुर व्यवहार और धार्मिक मूल्यों को अपनाएँ।
श्री तुलसी चालीसा का आध्यात्मिक संदेश
श्री तुलसी चालीसा का मुख्य संदेश यह है कि जीवन में पवित्रता, श्रद्धा, सेवा और भगवान के प्रति अटूट विश्वास बनाए रखना चाहिए। तुलसी माता अपने भक्तों को अहंकार, क्रोध, लोभ और ईर्ष्या जैसी नकारात्मक प्रवृत्तियों से दूर रहकर प्रेम और सदाचार का मार्ग अपनाने की प्रेरणा देती हैं।
यह चालीसा हमें यह भी सिखाती है कि नियमित पूजा, नाम-स्मरण और सात्विक जीवनशैली अपनाने से मन में शांति तथा आध्यात्मिक संतुलन विकसित होता है।
सात्विक जीवन का महत्व
तुलसी माता सात्विकता और शुद्ध जीवन का प्रतीक हैं। उनकी उपासना हमें शुद्ध विचार, संयमित जीवन, नियमित पूजा और धार्मिक अनुशासन अपनाने की प्रेरणा देती है। परिवार में तुलसी का सम्मान करना भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक परंपरा का महत्वपूर्ण भाग माना जाता है।
श्री तुलसी चालीसा का नियमित पाठ व्यक्ति के भीतर विनम्रता, धैर्य, करुणा और सेवा जैसे दिव्य गुणों का विकास करने में सहायक माना जाता है।
नियमित पाठ का महत्व
प्रतिदिन अथवा विशेष रूप से कार्तिक मास, देवउठनी एकादशी, तुलसी विवाह, एकादशी, गुरुवार तथा भगवान विष्णु की पूजा के अवसर पर श्री तुलसी चालीसा का पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है। नियमित पाठ से मन में श्रद्धा, आत्मिक शांति, सकारात्मक सोच और भगवान विष्णु के प्रति समर्पण की भावना मजबूत होती है।
श्रद्धा और विश्वास के साथ किया गया यह पाठ जीवन में सात्विकता, धार्मिक अनुशासन और आध्यात्मिक जागरूकता विकसित करने का श्रेष्ठ माध्यम माना जाता है।
तुलसी माता की कृपा प्राप्त करने के सरल उपाय
- प्रतिदिन प्रातःकाल तुलसी माता को जल अर्पित करें और श्रद्धापूर्वक श्री तुलसी चालीसा का पाठ करें।
- भगवान श्री विष्णु और श्रीकृष्ण का नियमित स्मरण करें।
- सत्य, सेवा और सदाचार को अपने जीवन का आधार बनाएँ।
- सात्विक भोजन और शुद्ध जीवनशैली अपनाने का प्रयास करें।
- क्रोध, अहंकार और ईर्ष्या जैसी नकारात्मक भावनाओं से दूर रहें।
- जरूरतमंद लोगों की सहायता करें और मानव सेवा को ईश्वर सेवा समझें।
- भगवान के प्रति पूर्ण श्रद्धा और विश्वास बनाए रखते हुए नियमित भक्ति करें।
श्री तुलसी चालीसा से मिलने वाली प्रेरणा
श्री तुलसी चालीसा हमें यह सिखाती है कि जीवन की सबसे बड़ी शक्ति पवित्रता, भक्ति और सेवा है। तुलसी माता अपने भक्तों को प्रेम, विनम्रता, संयम, धार्मिक अनुशासन और भगवान के प्रति पूर्ण समर्पण का मार्ग दिखाती हैं।
जो भक्त श्रद्धा और समर्पण के साथ नियमित रूप से श्री तुलसी चालीसा का पाठ करते हैं, वे अपने जीवन में मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा, आध्यात्मिक संतुलन और भगवान विष्णु के प्रति गहरी भक्ति का अनुभव करते हैं। तुलसी माता की कृपा हमें सदैव सत्य, सात्विकता, सेवा और ईश्वर के प्रति अटूट विश्वास के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।
अब आइए, श्री तुलसी चालीसा से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण प्रश्नों के उत्तर जानते हैं, जो श्रद्धालुओं द्वारा अक्सर पूछे जाते हैं।
श्री तुलसी चालीसा से जुड़े सामान्य प्रश्न (FAQs)
1. श्री तुलसी चालीसा का पाठ किस दिन करना सबसे शुभ माना जाता है?
देवउठनी एकादशी, तुलसी विवाह, कार्तिक मास, एकादशी, गुरुवार तथा भगवान विष्णु के विशेष पूजन के अवसर पर श्री तुलसी चालीसा का पाठ अत्यंत शुभ माना जाता है। श्रद्धा और विश्वास के साथ इसका पाठ प्रतिदिन भी किया जा सकता है।
2. क्या श्री तुलसी चालीसा का पाठ प्रतिदिन किया जा सकता है?
हाँ, श्रद्धा और विश्वास के साथ प्रतिदिन श्री तुलसी चालीसा का पाठ किया जा सकता है। नियमित पाठ मन में सात्विकता, भक्ति, शांति और भगवान विष्णु के प्रति अटूट श्रद्धा विकसित करने की प्रेरणा देता है।
3. श्री तुलसी चालीसा पढ़ने का सबसे अच्छा समय कौन-सा है?
प्रातःकाल स्नान के बाद तुलसी माता को जल अर्पित करके तथा सायंकाल दीपक जलाकर श्रद्धापूर्वक श्री तुलसी चालीसा का पाठ करना शुभ माना जाता है।
4. क्या घर में श्री तुलसी चालीसा का पाठ किया जा सकता है?
हाँ, घर में स्थापित तुलसी माता के पौधे अथवा उनके चित्र के समक्ष श्रद्धा और एकाग्रता के साथ श्री तुलसी चालीसा का पाठ किया जा सकता है।
5. क्या महिलाएँ और पुरुष दोनों श्री तुलसी चालीसा का पाठ कर सकते हैं?
हाँ, तुलसी माता की आराधना सभी श्रद्धालुओं के लिए समान रूप से शुभ मानी जाती है। स्त्री, पुरुष, युवा, बुजुर्ग और बच्चे सभी श्रद्धापूर्वक इसका पाठ कर सकते हैं।
6. क्या श्री तुलसी चालीसा पढ़ने से पहले भगवान विष्णु का स्मरण करना चाहिए?
हाँ, तुलसी माता भगवान श्री विष्णु की परम प्रिय मानी जाती हैं। इसलिए पूजा आरंभ करने से पहले भगवान विष्णु और तुलसी माता का ध्यान करना शुभ माना जाता है।
7. क्या तुलसी विवाह के दिन श्री तुलसी चालीसा का विशेष महत्व है?
हाँ, तुलसी विवाह सनातन धर्म का अत्यंत पावन पर्व माना जाता है। इस दिन श्रद्धापूर्वक श्री तुलसी चालीसा का पाठ करना विशेष रूप से मंगलकारी माना जाता है।
8. क्या परिवार के सभी सदस्य मिलकर श्री तुलसी चालीसा का पाठ कर सकते हैं?
हाँ, परिवार के साथ सामूहिक रूप से श्री तुलसी चालीसा का पाठ करने से घर में सात्विक, भक्तिमय और सकारात्मक वातावरण का अनुभव होता है।
9. क्या विद्यार्थी भी श्री तुलसी चालीसा का पाठ कर सकते हैं?
हाँ, विद्यार्थी श्रद्धा और विश्वास के साथ इसका पाठ कर सकते हैं। यह उन्हें अनुशासन, सकारात्मक सोच, एकाग्रता और अच्छे संस्कार अपनाने की प्रेरणा देता है।
10. क्या श्री तुलसी चालीसा केवल विशेष पर्वों पर ही पढ़नी चाहिए?
नहीं, इसे केवल विशेष पर्वों पर ही नहीं बल्कि प्रतिदिन की पूजा और आध्यात्मिक साधना के रूप में भी पढ़ा जा सकता है।
11. तुलसी माता को भगवान विष्णु की प्रिय क्यों माना जाता है?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार तुलसी माता देवी वृंदा का दिव्य स्वरूप हैं और भगवान श्री विष्णु को तुलसी दल अत्यंत प्रिय है। इसलिए वैष्णव परंपरा में तुलसी का विशेष महत्व माना जाता है।
12. क्या श्री तुलसी चालीसा का नियमित पाठ आध्यात्मिक साधना का भाग बन सकता है?
हाँ, नियमित रूप से इसका पाठ करने से श्रद्धा, सात्विकता, मानसिक शांति और भगवान के प्रति समर्पण की भावना मजबूत होती है।
13. क्या तुलसी के बिना भगवान विष्णु की पूजा अधूरी मानी जाती है?
सनातन परंपरा में भगवान विष्णु, श्रीकृष्ण और शालिग्राम की पूजा में तुलसी दल का विशेष महत्व बताया गया है। इसलिए तुलसी को वैष्णव पूजा का महत्वपूर्ण अंग माना जाता है।
14. क्या श्री तुलसी चालीसा किसी भी आयु का व्यक्ति पढ़ सकता है?
हाँ, बच्चे, युवा, गृहस्थ, साधक और बुजुर्ग सभी श्रद्धा और विश्वास के साथ श्री तुलसी चालीसा का पाठ कर सकते हैं।
15. श्री तुलसी चालीसा का मुख्य संदेश क्या है?
श्री तुलसी चालीसा का मुख्य संदेश पवित्रता, भक्ति, सेवा, सात्विक जीवन, विनम्रता और भगवान के प्रति अटूट श्रद्धा बनाए रखना है। यही आध्यात्मिक शांति और धार्मिक जीवन का आधार माना जाता है।
निष्कर्ष
श्री तुलसी चालीसा तुलसी माता की पवित्रता, भगवान श्री विष्णु के प्रति उनके दिव्य समर्पण और भक्तों पर उनकी असीम कृपा का पवित्र स्तवन है। श्रद्धा और विश्वास के साथ इसका नियमित पाठ करने से मन में सात्विकता, मानसिक शांति, सकारात्मक सोच और ईश्वर के प्रति गहरी भक्ति विकसित होती है। यह चालीसा हमें सिखाती है कि सच्चा आध्यात्मिक जीवन पवित्र विचारों, सेवा, संयम और भगवान के प्रति पूर्ण समर्पण से ही संभव है।
तुलसी माता अपने भक्तों को प्रेम, करुणा, अनुशासन, धार्मिक आचरण और सदाचार का मार्ग अपनाने की प्रेरणा देती हैं। उनका दिव्य स्वरूप यह संदेश देता है कि शुद्ध मन और निष्काम भक्ति से किया गया प्रत्येक कार्य भगवान को प्रिय होता है।
यदि आप श्रद्धा, नियमितता और पूर्ण समर्पण के साथ श्री तुलसी चालीसा का पाठ करते हैं, तो यह आपकी दैनिक आध्यात्मिक साधना का महत्वपूर्ण भाग बन सकता है तथा आपको मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा, सात्विक जीवन और भगवान विष्णु एवं तुलसी माता की दिव्य कृपा का अनुभव कराने में सहायक हो सकता है।
॥ जय श्री तुलसी माता ॥
॥ ॐ नमो नारायणाय ॥
श्री राम चालीसा (Ram Chalisa)
श्री राधा चालीसा (Radha Chalisa)
श्री खाटू श्याम चालीसा (Khatu Shyam Chalisa)
श्री हनुमान चालीसा (Hanuman Chalisa)
श्री साईं चालीसा (Sai Chalisa)
श्री वैष्णो देवी चालीसा (Vaishno Devi Chalisa)